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'अफ़ग़ान जनता से मुँह मोड़ने का समय नहीं', सहायता प्रयासों की पुकार

अफ़ग़ानिस्तान में हालात पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष प्रतिनिधि डेबराह लियोन्स ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान पर तालेबान के वर्चस्व के बाद, स्थानीय आबादी को महसूस हो रहा है कि उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है, और उन्हें ऐसे हालात का दण्ड मिल रहा है, जिसमें उनका कोई दोष नहीं है. यूएन की विशेष प्रतिनिधि ने बुधवार को सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों को अफ़ग़ानिस्तान में हालात से अवगत कराते हुए बताया कि देश के भीतर व बाहर भरोसे की कमी के बीच तालेबान प्रशासन, स्वयं को सरकार के रूप में दर्शाने का प्रयास कर रहा है, और अन्तरराष्ट्रीय मान्यता के लिये रुक-रुककर क़दम उठा रहा है. उन्होंने कहा, “अफ़ग़ान जनता का साथ छोड़ना अब एक ऐसी ऐतिहासिक ग़लती होगी, जो पहले भी हो चुकी है और जिसके त्रासदीपूर्ण नतीजे भुगतने पड़े हैं.” "Now is not the time to turn away from the Afghan people". Speaking to the media, Special Representative @DeborahLyonsUN stressed the need for the regional and global community to remain engaged in helping the people of #Afghanistan. pic.twitter.com/2RLRaN2MRU — UN Political and Peacebuilding Affairs (@UNDPPA) November 17, 2021 उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों में तालेबान प्रशासन से सृजनात्मक माहौल में सम्पर्क, उपयोगी साबित हुआ है, और तालेबान ने देश में संयुक्त राष्ट्र की मौजूदगी व सहायता को मूल्यवान माना है. “वे अन्तरराष्ट्रीय मान्यता चाहते हैं और भरोसे के अभाव को पाटने के रास्ते भी, जोकि उनके मुताबिक़ अन्तरराष्ट्रीय समुदाय और उनके बीच मौजूद हैं.” यूएन मिशन प्रमुख ने कहा कि तालेबान के साथ बातचीत के दौरान, महिला अधिकारों, लड़कियो की शिक्षा, उत्पीड़न व न्यायेतर हत्याओं के मामले भी उठाये गए हैं. उन्होंने बताया कि तालेबान ने कुछ ग़लतियाँ होने की बात स्वीकार की है, जिन्हें ना दोहराये जाने का प्रयास किया जा रहा है. मगर, तालेबान प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फ़िलहाल कुछ विशेष मुद्दों पर, सीमित छूट ही दी जा सकती है. उन्होंने कहा कि तालेबान प्रशासन ने संकेत दिया है कि लड़कियों के लिये शिक्षा के अधिकार पर एक राष्ट्रव्यापी नीति पर काम किया जा रहा है. यूएन को विश्वसनीय रिपोर्टें मिली हैं, जिनके मुताबिक़ घरों की तलाशी के बाद पूर्व सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों की न्यायेतर हत्याएं की गई हैं. मगर, तालेबान, इस्लामिक स्टेट (दाएश) खोरासान प्रान्त के बढ़ते प्रभाव को रोक पाने में नाकाम साबित हुआ है. वर्ष 2020 में 60 आतंकवादी हुए थे, मगर यह संख्या इस वर्ष बढ़कर 334 पहुँच गई है. गम्भीर मानवीय हालात उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान एक ऐसी मानवीय आपदा के कगार पर खड़ा है, जिसे टाला जा सकता है. बैंकिंग प्रणाली अवरुद्ध है, सकल घरेलू उत्पाद 40 प्रतिशत तक सिकुड़ गया है और नक़दी की भीषण किल्लत है. सालों तक कमाई के बावजूद, लोग अपनी बचत का इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं हैं. अस्पतालों में दवाएँ ख़त्म हो रही हैं, और मरीज़ों को वापिस भेजा जा रहा है. महंगाई बढ़ी है और सर्दी से पहले ईंधन व खाद्य सामानों की उपलब्धता भी कम हो गई है. यूएन की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान की लगभग आधी आबादी को, संकट या आपात स्तर की खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है. सर्दी के मौसम में हालात के और भी ख़राब होने और दो करोड़ 30 लाख अफ़ग़ानों के खाद्य असुरक्षा का शिकार होने का जोखिम है. राहत प्रयास अनेक बाधाओं के बावजूद, दानदाताओं के उदारता व समर्थन से, ज़रूरतमन्दों के लिये मानवीय राहत प्रयासों को जारी रखा गया है. इस वर्ष की तीसरी तिमाही में, यूएन मानवीय राहत एजेंसियों व ग़ैरसरकारी संगठनों ने, देश भर में एक करोड़ से अधिक लोगों तक मदद पहुँचाई है. इनमें खाद्य सहायता, कृषि व आजीविका सहायता, बच्चों में कुपोषण का उपचार, चिकित्सा परामर्श और सूखा प्रभावित लोगों के लिये जल का प्रबन्ध करना है. यूएन प्रतिनिधि ने कहा कि मानवीय सहायता पर्याप्त नहीं है. अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों, खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में कर्मचारियों तक वित्तीय समर्थन पहुँचाने के रास्तों की तत्काल तलाश करनी होगी. लड़कियों के लिये शिक्षा के अधिकार को कारगर ढँग से पूरा किये जाने के बाद, ये समर्थन अन्तत: शिक्षकों तक भी पहुँचाना होगा. उन्होंने चिन्ता जताई कि मौजूदा हालात में चरमपंथ के उभरने का ख़तरा बढ़ जता है. औपचारिक अर्थव्यवस्था बदहाल है, जिसके मद्देनज़र, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था पैर फैला सकती है और इससे ग़ैरक़ानूनी मादक पदार्थों, हथियारों की ख़रीद-फ़रोख़्त और मानव तस्करी को बढ़ावा मिलेगा. बैंकिग सैक्टर के समक्ष मौजूद चुनौतियों के कारण, बिना किसी जवाबदेही और बेरोकटोक अनौपचारिक धन के लेनदेन से आतंकवाद, मानव व मादक पदार्थों की तस्करी की आशंका बढ़ जाएगी. --संयुक्त राष्ट्र समाचार/UN News

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