Uttarkashi Tunnel: सुरंग में वर्टिकल ड्रिलिंग से जगी आस, मजदूरों को बचाने के लिए सेना ने संभाला मोर्चा

Uttarkashi News: उत्तराखंड के उत्तरकाशी की निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को निकालने के लिए वर्टिकल ड्रिलिंग भी शुरू हो चुकी है।
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उत्तरकाशी, हि.स.। उत्तराखंड के उत्तरकाशी की निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को निकालने के लिए वर्टिकल ड्रिलिंग भी शुरू हो चुकी है। यदि कोई बाधा नहीं आई तो बचावकर्मी अगले दो दिन में श्रमिकों तक पहुंच सकते हैं। 15 दिन से मजदूर सुरंग के अंदर हैं। वहां उनकी सेहत कैसी है और उनकी मेंटल हेल्थ कैसी है, वह कैसा महसूस कर रहे हैं, इसका पता लगाने के लिए ड्रोन के जरिए मजदूरों से संपर्क किया जाएगा। ड्रोन के जरिए मजदूरों का हाल चाल लिया जाएगा। इस काम के लिए भारतीय सेना ने ड्रोन मैन मिलिंद राज से संपर्क किया है, जो अपनी रोबोटिक्स इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करके 41 मजदूरों को निकालने के लिए चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा करने में मदद करेंगे।

अब तक 24 मीटर वर्टिकल ड्रिलिंग हो चुकी

राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक महमूद अहमद ने सिलक्यारा में पत्रकारों को बताया कि अब तक 24 मीटर वर्टिकल ड्रिलिंग हो चुकी है। कुल 86 मीटर खोदाई करनी है। सुरंग के ऊपरी और दूसरे छोर से काम में तेजी लाने के लिए और टीमें बुलाई गई हैं। ओएनजीसी की एक टीम आंध्र प्रदेश के राजामुंदरी से पहुंची है। इस बीच 800 एमएम के पाइप में फंसे ऑगर मशीन के ब्लेड को हैदराबाद से मंगाए गए प्लाज्मा और लेजर कटर से काटा जा रहा है। आज यहां केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला के पहुंचने की संभावना है। पाइप से मशीन के मलबे को निकालने के बाद मैनुअल खोदाई भी शुरू की जाएगी।

वायुसेना भी मदद में जुटी

बचाव कार्य में मदद के लिए भारतीय सेना की इंजीनियरिंग कोर के एक समूह मद्रास सैपर्स की एक इकाई सिलक्यारा पहुंच गई। इसमें 30 सैन्यकर्मी हैं। यह सैन्यकर्मी नागरिकों के साथ मिलकर हाथ, हथौड़े और छेनी से सुरंग के अंदर के मलबे को खोदेंगे। फिर पाइप को उसके अंदर बने प्लेटफॉर्म से आगे की ओर धकेलेंगे। वायुसेना भी मदद में जुटी है। वायुसेना ने रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन से कई महत्वपूर्ण उपकरण भेजे हैं।

सुरंग में फंसे 41 मजदूरों तक जल्द पहुंचने की आस फिर बंधी

इस बीच सुरंग में फंसे 41 मजदूरों तक जल्द पहुंचने की आस फिर बंध गई है। रविवार से चार रास्तों से मजदूरों तक पहुंचने का काम शुरू किया गया है। हैदराबाद से आए लेजर कटर व चंडीगढ़ से आए प्लाज्मा कटर से पाइप में फंसे ऑगर मशीन के ब्लेड को काटा जा रहा है। अच्छी बात यह है कि सुरंग में मजदूरों के पास कल पहली बार बीएसएनएल की घंटी बजी। बीएसएनएल ने 6 इंच के पाइप से अपनी लाइन पहुंचाने के साथ ही एक लैंडलाइन फोन भी पहुंचा दिया है।

सुरंग में फंसे श्रमिकों को बचाने के लिए सभी प्रयास जारी

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने नई दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि सुरंग में फंसे श्रमिकों को बचाने के लिए सभी प्रयास जारी हैं। हसनैन ने कहा कि दूसरा सबसे अच्छा विकल्प माने जाने वाली लंबवत ड्रिलिंग का काम दोपहर के आसपास शुरू हुआ।

उन्होंने बताया कि 86 मीटर की लंबवत ड्रिलिंग के बाद फंसे हुए श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए सुरंग की ऊपरी परत को तोड़ना होगा। श्रमिकों को बचाने के लिए 6 योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। अब तक का सबसे अच्छा विकल्प क्षैतिज ड्रिलिंग है। इसके तहत 47 मीटर की ड्रिलिंग पूरी हो चुकी है।

युद्धस्तर पर बचाव अभियान जारी

उल्लेखनीय है कि सुरंग के मलबे में ड्रिलिंग करने वाली ऑगर मशीन के ब्लेड शुक्रवार रात मलबे में फंस गए, जिससे अधिकारियों को अन्य विकल्पों पर विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ा। चारधाम यात्रा मार्ग पर बन रही सुरंग का एक हिस्सा 12 नवंबर को ढह गया था। इस दौरान काम कर रहे 41 श्रमिक फंस गए थे। तब से विभिन्न एजेंसियां उन्हें बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चला रही हैं।

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