नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे लगभग साफ हो गए हैं। राज्य में भारतीय जनता पार्टी तीसरी बार सरकार बना रही है। इस बीच बतौर निर्दलीय उम्मीदवार सावित्री जिंदल ने हिसार सीट जीत ली है। उन्होंने अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के राम निवास रारा को 18,941 वोटों के अंतर से हराया है। आपको बता दें कि सावित्री जिंदल भारत की सबसे अमीर महिला हैं। वो ओपी जिंदल ग्रुप की चेयरपर्सन हैं।
भारत की सबसे अमीर महिला
सावित्री जिंदल भारत की सबसे अमीर महिला हैं। चुनाव आयोग में दिए एफिडेविट के मुताबिक, सावित्री जिंदल की नेटवर्थ 270 करोड़ रुपये की है। उनके पास 190 करोड़ की चल और 80 करोड़ की अचल संपत्ति है। इस साल अगस्त फोर्ब्स इंडिया की सूची में सावित्री जिंदल को देश की सबसे अमीर महिला बताया गया था, उनकी नेटवर्थ 39.5 बिलियन डॉलर यानी करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये है।
पति के मृत्यु के बाद कमान अपने हाथों मे ली
सावित्री जिंदल के पति ओपी जिंदल ने जिंदल ग्रुपल की स्थापना की थी। ओपी जिंदल हिसार विधानसभा सीट से तीन बार विधायक चुने गए और हरियाणा सरकार में ऊर्जा मंत्री भी रहे। ओपी जिंदल का साल 2005 में हेलिकॉप्टर क्रैश में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद सावित्री जिंदल ने जिंदल ग्रुप की कमान संभाली।
क्या है निर्दलीय चुनाव लड़ने के पीछे का कारण?
सावित्री जिंदल और उनके बेटे नवीन जिंदल दोनों ही कांग्रेस पार्टी के सदस्य थे। मार्च में दोनों ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन कर लिया। नवीन जिंदल ने कुरुक्षेत्र सीट से बीजेपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। सावित्री जिंदल को उम्मीद थी कि विधानसभा चुनाव में हिसार से बीजेपी उन्हें टिकट देगी, लेकिन पार्टी ने कमल गुप्ता को टिकट दे दिया। इसके बाद सावित्री जिंदल ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया और जीत भी हासिल की।
नामांकन के दौरान सावित्री जिंदल ने ये कहा था
जब सावित्री ने हिसार चुनाव नें अपना नामांकन कराया था तब उन्होंने कहा था कि वो हिसार के विकास और बदलाव के लिए सेवा करने का संकल्प ले रही हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि हिसार के लोग उनका परिवार हैं और ओम प्रकाश जिंदल ने इस परिवार से उनका नाता जोड़ा था। जिदंल परिवार हमेशा से हिसार की सेवा में है। सावित्री जिंदल ने कहा, “मै लोगो की उम्मीद पर खरा उतरने और उनके भरोसे को कायम रखने के लिए पूरी तरह से समर्पित हूं,” उन्होंने 12 सितंबर को एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन कराया था।





