नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । अभिनेता आमिर खान ने हाल ही में ऑस्कर की सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर श्रेणी में नामांकन प्राप्त करने में भारतीय फिल्मों के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की है। आमिर ने इस बारे में अपनी राय साझा की कि भारतीय फिल्में अक्सर इस प्रतिष्ठित श्रेणी में क्यों पिछड़ जाती हैं। साथ ही अभिनेता शाहरुख खान द्वारा पहले की गई टिप्पणियों पर भी असहमति जताई है। उल्लेखनीय है कि आमिर की 2001 की फिल्म लगान इस श्रेणी में नामांकन प्राप्त करने वाली सबसे लास्ट भारतीय फिल्म बनी हुई है। वहीं, अब आमिर अपनी प्रोड्यूस की हुई फिल्म ‘लापता लेडीज’ को प्रमोट कर रहे हैं, जिसे अगले ऑस्कर अवॉर्ड्स के लिए भारत की तरफ से ऑफिशियल एंट्री बनाया गया है।
एक इंटरव्यू में आमिर खान ने शाहरुख खान के साथ अपनी असहमति व्यक्त की कि भारतीय फिल्में ऑस्कर में ध्यान आकर्षित करने के लिए संघर्ष क्यों करती हैं। दरअसल, शाहरुख ने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था कि “लगान एक कला और व्यावसायिक फिल्म का एक संयोजन था और यह एक शानदार फिल्म थी। लेकिन हमें अपनी फिल्मों का प्रारूप बदलना होगा। अगर मुझे आपकी पार्टी में आमंत्रित किया जाता है, तो मुझे आपके बताए गए कोड के अनुसार कपड़े पहनने होंगे। मैं ढाई घंटे और पांच गानों का अपना कोड नहीं पहन सकता। हमें इसे बदलना होगा।” अब इस बारे में आमिर खान ने अपने विचार साझा किए कि भारतीय फिल्में ऑस्कर में क्यों नहीं पहुंच पातीं।
आमिर खान ने हाल ही में उन कारणों पर चर्चा की, जिनकी वजह से भारतीय फिल्में अक्सर ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर श्रेणी के लिए नामांकन से चूक जाती हैं। आमिर ने बताया कि ऑस्कर नामांकन प्राप्त करना, विशेष रूप से सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर श्रेणी में बेहद चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस श्रेणी में लगभग 80 देशों की सर्वश्रेष्ठ फिल्में शामिल हैं, जिससे अन्य श्रेणियों की तुलना में प्रतिस्पर्धा कठिन हो जाती है। ईरान, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों से असाधारण प्रविष्टियों के साथ नामांकन प्राप्त करना अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कड़ी वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण ही भारत को हर साल नामांकन नहीं मिलता है।
आमिर खान ने कहा कि लगान, छह गानों के साथ तीन घंटे और 42 मिनट लंबी होने के बावजूद भी नामांकन अर्जित करती है। आमिर ने कहा कि महत्वपूर्ण बात प्रभावशाली काम करना है जो दर्शकों को पसंद आए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अकादमी के सदस्य फिल्म की लंबाई या प्रारूप की परवाह किए बिना गुणवत्ता की सराहना करते हैं और दुनिया भर में असाधारण फिल्मों से कड़ी प्रतिस्पर्धा को स्वीकार किया।
गौरतलब है कि भारतीय इतिहास में केवल तीन फिल्में- मदर इंडिया, सलाम बॉम्बे और लगान ऑस्कर में अंतर्राष्ट्रीय फीचर श्रेणी में नामांकित हुई हैं। हाल ही में आरआरआर ने सर्वश्रेष्ठ मूल गीत की ट्रॉफी जीती, जबकि द एलीफेंट व्हिस्परर्स ने सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट जीता। इसके अलावा राइटिंग विद फायर और ऑल दैट ब्रीथ्स को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फीचर श्रेणी में नामांकन मिला।





