नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। जो दिखता है वो बिकता है और कई बार वो भी बिकता है जिसके देखे जाने का भ्रम पैदा किया जाता है। फिल्म मेकर्स पर बीते कुछ सालों में इसी देखे जाने का भ्रम पैदा करने के आरोप लगे हैं। माने फिल्म मेकर्स दावा करते हैं कि उनकी फिल्म हाउसफुल हो गई, उनकी फिल्म ने करोड़ों कमा लिए, इससे जिन लोगों ने फिल्म नहीं देखी होती वो FOMO का शिकार हो जाते हैं और टिकट खरीदकर फिल्म देखने पहुंच जाते हैं। FOMO यानि फियर ऑफ मिसिंग आउट। इस FOMO को क्रिएट करने के लिए जिस टूल का इस्तेमाल किया जाता है, उसे कहते हैं Block Booking. इस प्रैक्टिस का ताज़ा आरोप लगा है Vicky Kaushal और Rashmika की फिल्म Chhava और उसके मेकर्स पर। ब्लॉक बुकिंग के आरोप आलिया भट्ट की फिल्म जिगरा पर भी लगे थे। अक्षय कुमार की फिल्म स्काई फोर्स पर भी ये आरोप लगे थे।
Block Booking क्या होती है?
आपको याद है बचपन में स्कूल की तरफ से फिल्म देखने लेकर जाया जाता था। तब स्कूल वाले फिल्म के एक शो की बड़ी संख्या में टिकटें खरीद लेते थे, ताकि सारे बच्चे एक साथ फिल्म देख पाएं। इस बड़ी संख्या में टिकट खरीदने को कहते हैं ब्लॉक बुकिंग। ब्लॉक बुकिंग होटलों में होती है जहां लोग अपने इवेंट्स के लिए बड़ी संख्या में कमरे बुक करते हैं। ब्लॉक बुकिंग फ्लाइट में, बसों में भी हो सकती है। यानी ब्लॉक बुकिंग गलत चीज़ नहीं है। बिल्कुल, लेकिन तब जब ये जरूरत के लिए हो, भ्रम पैदा करने के लिए नहीं।
फिल्म इंडस्ट्री में Block Booking एक ऐसी प्रैक्टिस है जिसकी मदद से फिल्ममेकर्स ये दिखाते हैं कि बॉक्स ऑफिस पर उनकी टिकटें खूब बिक रही हैं। इसे Inflated Box office Collection भी कहा जाता है। जब मेकर्स ये बताते हैं कि उनकी फिल्म खूब देखी जा रही है तो इससे ऑडियंस में ये भ्रम पैदा होता है कि फिल्म अच्छी है, तभी इतने लोग देख रहे हैं और उनके थियेटर जाकर फिल्म देखने की संभावना बढ़ जाती है।
Block Booking के तरीके क्या हैं?
पहला तरीका फिल्म के प्रोड्यूसर, एक्टर, डायरेक्टर या स्टूडियो… यानी वो लोग जिनपर फिल्म की कमाई का सीधा असर पड़ने वाला है वो बड़ी संख्या में फिल्म की टिकट खुद खरीद लेते हैं।
दूसरा तरीका, फिल्म के एक्टर्स उन ब्रांड्स के साथ फिल्म की टिकटें खरीदने की डील करते हैं जिन्हें वो एन्डोर्स करते हैं। माने एक एक्टर एक ब्रांड से कह दे कि वो उनकी फिल्म की 10 हजार टिकट खरीद लें और बदले में वो अपनी फीस कुछ कम कर देंगे या फिर फ्री में ब्रांड प्रमोशन कर देंगे।
Block Booking से फायदा क्या? Komal Nahta ने बताया
फिल्म ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा ने इस ब्लॉक बुकिंग को समझाते हुए एक वीडियो बनाया है। कोमल नाहटा अपने वीडियो में बता रहे हैं कि फिल्म इंडस्ट्री परेसेप्शन पर चलती है। परसेप्शन यानी आपके बारे में क्या सोचा जा रहा है। वो कहते हैं कि हर कोई यही कोशिश करता है कि वो ऐसी फिल्म बनाए जिसे दर्शक और आलोचक खूब पसंद करें। पर कई बार ऐसा नहीं हो पाता, लेकिन उस फिल्म से जुड़े लोगों के लिए ये परसेप्शन बनाए रखना जरूरी होता है कि उनकी फिल्म खूब चल रही है, खूब देखी जा रही है, क्योंकि इस परसेप्शन के दम पर इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि लोग फिल्म देखने जाएंगे।
कोमल नाहटा कहते हैं कि ब्लॉक बुकिंग होने पर जब आप ऑनलाइन प्लैटफॉर्म पर टिकट बुक करने जाते हैं तो आपको दिखता है कि गिनती की सीट्स बची हैं। इससे आपके मन में उस फिल्म के अच्छे होने का भ्रम पैदा होता है और आप टिकट खरीद लेते हैं। जबकि असल में वो सीटें खाली होती हैं।
Block Booking में किसका नुकसान?
फिल्म ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा कि ब्लॉक बुकिंग फिल्म इंडस्ट्री में पुरानी प्रैक्टिस है। वो बताते हैं कि 70 और 80 के दशक में भी फिल्म मेकर्स सिनेमा हॉल में हाउसफुल का बोर्ड लगवाने के लिए बड़ी संख्या में टिकटें खरीद लेते थे। वो कहते हैं कि एग्जिबिटर्स को भी इससे कोई समस्या नहीं होती है क्योंकि टेक्निकली टिकटें बिक रही होती हैं। वो कहते हैं, ‘आजकल तो बड़े लेवल पर ये सब हो रहा है। एग्जिबिटर्स खुश हैं, अब चाहे टिकट प्रोड्यूसर खुद खरीदे या एक्टर या स्टूडियो।’
ब्लॉक बुकिंग में टिकट खरीदने वाले एक्टर्स, प्रोड्यूसर्स या स्टूडियो एक बड़ा अमाउंट ये परसेप्शन बिल्ड करने में खर्च करते हैं कि उनकी फिल्म खूब देखी जा रही है। हालांकि, दर्शकों को बेवकूफ बनाने में सफल होने पर स्टूडियोज़ का ये पैसा रिकवर हो जाता है। अल्टिमेटली इसका नुकसान एक अच्छी फिल्म देखने का मन बनाने वाले दर्शक को होता है। जिसके पैसे भी खर्च होते हैं और समय भी।





