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Monday, March 2, 2026
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राम के रोल से मिली पहचान, लेकिन करियर पर पड़ा भारी असर – अरुण गोविल की अनकही कहानी

रामायण से मिली अपार शोहरत के बावजूद भगवान राम का किरदार अरुण गोविल के करियर पर भारी पड़ गया।रातों-रात स्टार बने अरुण गोविल को इसी छवि के कारण करीब 14 साल तक काम के लिए संघर्ष करना पड़ा।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। साल 1987 में जब दूरदर्शन पर रामानंद सागर की रामायण शुरू हुई, तब पूरा देश भक्ति में डूब गया। सड़कों पर सन्नाटा, घरों में दीपक और अगरबत्ती यह सिर्फ एक टीवी सीरियल नहीं, बल्कि आस्था का पर्व बन गया था। इस ऐतिहासिक शो ने कई कलाकारों की किस्मत रातों-रात बदल दी, लेकिन भगवान राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल के लिए यही भूमिका आगे चलकर सबसे बड़ी चुनौती बन गई।

शो के प्रसारण के साथ ही अरुण गोविल घर-घर में पूजे जाने लगे।

अरुण गोविल पहले से फिल्मों में बतौर हीरो काम कर चुके थे। उन्होंने जानबूझकर टीवी की ओर रुख किया और जब उन्हें रामानंद सागर की रामायण में भगवान राम का किरदार मिला, तो वे बेहद खुश थे। शो के प्रसारण के साथ ही अरुण गोविल घर-घर में पूजे जाने लगे। लोग उन्हें असल जिंदगी में भी भगवान राम की तरह देखने लगे। भारत ही नहीं, विदेशों से भी उनके पास हजारों चिट्ठियां आने लगीं। लोकप्रियता ऐसी थी कि वे जहां जाते, लोग चरण छूने लगते।

आप तो भगवान राम हैं, हम आपको किसी आम या सपोर्टिंग रोल में कैसे लें?

लेकिन इस अपार प्रसिद्धि के पीछे एक कड़वी सच्चाई छिपी थी। रामायण खत्म होने के बाद अरुण गोविल को काम मिलना लगभग बंद हो गया। उन्होंने खुद कई इंटरव्यू में बताया कि राम का किरदार निभाने के बाद करीब 14 साल तक वे काम के लिए तरसते रहे। इंडस्ट्री के बड़े-बड़े प्रोड्यूसर उनसे हाथ जोड़कर माफी मांगते थे और कहते थेआप तो भगवान राम हैं, हम आपको किसी आम या सपोर्टिंग रोल में कैसे लें?

भगवान राम की पवित्र और आदर्श छवि करियर में दीवार बन गई।

अरुण गोविल ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा यह स्थिति कुछ समय की होगी, लेकिन समय बीतता गया और ऑफर नहीं आए। प्रोड्यूसर्स उनकी छवि से इतने प्रभावित थे कि उन्हें किसी और किरदार में देखने की हिम्मत ही नहीं कर पाते थे। भगवान राम की पवित्र और आदर्श छवि उनके अभिनय करियर के रास्ते में दीवार बन गई।

इंडस्ट्री उन्हें सिर्फ राम के रूप में ही देखना चाहती थी

कपिल शर्मा शो में जब अरुण गोविल, दीपिका चिखलिया और सुनील लाहिड़ी साथ नजर आए, तब भी उन्होंने यह दर्द साझा किया। उन्होंने कहा कि रामायण ने उन्हें जीवन में सम्मान, पहचान और प्यार तो बहुत दिया, लेकिन एक अभिनेता के रूप में उनकी संभावनाओं को सीमित कर दिया। इंडस्ट्री उन्हें सिर्फ राम के रूप में ही देखना चाहती थी, अभिनेता अरुण गोविल के रूप में नहीं।

भगवान राम की भूमिका निभाना गर्व की बात थी

यह कहानी सिर्फ अरुण गोविल की नहीं, बल्कि उस कलाकार की है, जो किसी एक किरदार में इतना रच-बस जाए कि लोग उसे उससे बाहर स्वीकार ही न कर पाएं। भगवान राम की भूमिका निभाना गर्व की बात थी, लेकिन उसी भूमिका ने उनके करियर को लंबा ब्रेक दे दिया।

आज भी अरुण गोविल को लोग श्रद्धा से “राम” कहकर बुलाते हैं। यह सम्मान कम कलाकारों को नसीब होता है, लेकिन इसके पीछे छुपी यह सच्चाई बताती है कि कभी-कभी अत्यधिक लोकप्रियता भी किसी कलाकार के लिए अभिशाप बन सकती है।

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