नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। 1 सितंबर 1990 को राजस्थान के एक छोटे से गांव खैरथल में जन्मे जितेंद्र कुमार का जीवन कभी भी सामान्य नहीं रहा। भारतीय समाज में IIT प्रवेश परीक्षा का पास होना एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, और यही सपना लाखों छात्रों का होता है। लेकिन जितेंद्र कुमार का जीवन कहानी कुछ अलग है। उन्होंने IIT खड़गपुर से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री तो हासिल की, लेकिन उसी पढ़ाई के दौरान उन्हें अभिनय में ऐसी रुचि आई कि उन्होंने अपनी सुरक्षित इंजीनियरिंग की नौकरी को छोड़कर अपनी पूरी जिंदगी अभिनय को समर्पित कर दी। आज वह OTT की दुनिया के सबसे लोकप्रिय और सबसे ज्यादा फीस लेने वाले सितारों में से एक हैं।
शुरुआत से लेकर IIT तक का सफर
जितेंद्र कुमार का बचपन एक छोटे से गांव में बीता। उन्होंने शुरू से ही अभिनय के प्रति अपनी रुचि दिखाई थी, और अक्सर अपने पसंदीदा सितारोंशाहरुख खान, नाना पाटेकर और अमिताभ बच्चन की नकल किया करते थे। हालांकि, उनके पिता चाहते थे कि उनका बेटा बड़ा आदमी बने, तो उन्होंने जितेंद्र को IIT की तैयारी के लिए कोटा भेज दिया।
कोटा में संघर्ष करते हुए जितेंद्र ने अपनी मेहनत से IIT प्रवेश परीक्षा पास की और IIT खड़गपुर में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया। यह एक बड़ी सफलता थी, क्योंकि IIT जैसी प्रतिष्ठित संस्था में प्रवेश पाना किसी भी छात्र के लिए गौरव की बात होती है। लेकिन जितेंद्र का मन हमेशा अभिनय की ओर ही था। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने ‘हिंदी टेक्नोलॉजी ड्रामेटिक सोसाइटी’ में हिस्सा लिया और यहीं से उनका अभिनय का सपना जाग उठा।
IIT में उनकी पढ़ाई और थिएटर की दुनिया के बीच एक अनोखा संतुलन बना था, लेकिन उनकी असल यात्रा तब शुरू हुई जब उन्होंने टीवीएफ के क्रिएटिव डायरेक्टर बिस्वपति सरकार से मुलाकात की। यही वो वक्त था जब जितेंद्र कुमार ने थिएटर और अभिनय के साथ अपने करियर की ओर कदम बढ़ाया।
IIT के बाद नौकरी छोड़ अभिनय की राह अपनाना
2012 में IIT से ग्रैजुएट होने के बाद जितेंद्र कुमार ने बेंगलुरु की एक मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर के रूप में नौकरी शुरू की। यह एक सुरक्षित और ऊंची सैलरी वाली नौकरी थी, लेकिन जितेंद्र का दिल हमेशा अभिनय के पीछे दौड़ता था। वह जानते थे कि अगर वह अपने सपने को पूरा करना चाहते हैं तो उन्हें किसी दिन अपने नौकरी को छोड़ना होगा।
तभी एक दिन उनकी किस्मत ने पलटी खाई। TVF का एक स्केच, मुन्ना जज्बाती, जिसमें उन्होंने एक भावुक प्रशिक्षु का किरदार निभाया था, वायरल हो गया। इसने जितेंद्र को एक नया मोड़ दिया और आठ महीने के अंदर उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। वह मुंबई आ गए और अभिनय के क्षेत्र में अपनी किस्मत आजमाने लगे।
मुंबई में संघर्ष और ट्यूशन पढ़ाकर गुजारा
मुंबई में आकर जितेंद्र कुमार ने एकबार फिर से संघर्ष करना शुरू किया। फिल्म इंडस्ट्री में शुरुआत से ही प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा होती है, और उनकी स्थिति भी अलग नहीं थी। शुरुआत में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। गुजारा करने के लिए उन्होंने छात्रों को ट्यूशन देना शुरू किया और IIT-JEE की कोचिंग क्लासेस में पढ़ाना शुरू किया। वह बताते हैं, “मैंने अपने पुराने नोट्स निकाले और रविवार को पढ़ाता था, बाकी दिन एक्टिंग पर ध्यान देता था।”
लेकिन जितेंद्र कुमार का मन पूरी तरह से अभिनय में ही था, और उन्होंने जल्द ही कई छोटे-छोटे रोल्स करना शुरू कर दिए। उन्होंने TVF के शोज पिचर्स, बैचलर्स, बिष्ट प्लीज! और इम्मैच्योर में छोटे लेकिन यादगार किरदार निभाए।
‘कोटा फैक्ट्री’ से बनी असली पहचान
जितेंद्र कुमार की असली पहचान तब बनी जब वह कोटा फैक्ट्री में ‘जीतू भैया’ का किरदार निभाने के लिए चुने गए। कोटा फैक्ट्री एक वेब सीरीज है, जो IIT की तैयारी करने वाले छात्रों के संघर्ष और सपनों की कहानी पर आधारित है। जितेंद्र का ‘जीतू भैया’ का किरदार छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। उनका यह किरदार हर छात्र के दिल को छू गया, खासकर उन बच्चों के लिए जो IIT की कठिन राह पर हैं।





