नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । दक्षिण भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता धनुष अब भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की भूमिका में नजर आएंगे। इस बहुप्रतीक्षित बायोपिक का निर्देशन कर रहे हैं राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक ओम राउत। फिल्म की आधिकारिक घोषणा फ्रांस में चल रहे प्रतिष्ठित कान फिल्म फेस्टिवल 2025 के दौरान की गई, जिसके बाद से दर्शकों में इस प्रोजेक्ट को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की बायोपिक पर काम आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुका है। यह फिल्म भारत के 11वें राष्ट्रपति और ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ के रूप में प्रसिद्ध डॉ. कलाम के असाधारण जीवन और प्रेरणादायक सफर को सिल्वर स्क्रीन पर लाने की कोशिश है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का निर्माण अभिषेक अग्रवाल कर रहे हैं, जिनकी प्रोडक्शन कंपनी ‘द कश्मीर फाइल्स’ जैसी चर्चित फिल्म से जुड़ी रही है। इसके अलावा, फिल्म को भूषण कुमार की टी-सीरीज का भी समर्थन प्राप्त है, जो इसके निर्माण में सह-निर्माता के रूप में शामिल है।
साधारण परिवार से शुरू हुई असाधारण कहानी
इस प्रेरणादायक बायोपिक की पटकथा साईविन क्वाड्रास ने लिखी है, जो नीरजा, मैदान और परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण जैसी चर्चित और प्रभावशाली फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। फिल्म डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के उस असाधारण सफर को दर्शाएगी, जिसकी शुरुआत तमिलनाडु के छोटे से शहर रामेश्वरम में एक साधारण परिवार से हुई थी। कठिनाइयों और सीमित संसाधनों के बावजूद, कलाम ने अपनी मेहनत, लगन और अदम्य इच्छाशक्ति के दम पर न सिर्फ देश के अग्रणी वैज्ञानिकों में स्थान बनाया, बल्कि भारत के 11वें राष्ट्रपति बनकर करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बन गए। फिल्म में उनके संघर्ष, उपलब्धियों और राष्ट्र निर्माण में योगदान की झलक देखने को मिलेगी।
कलाम सिर्फ नेता नहीं, एक विचारधारा थे – ओम राउत
निर्देशक ओम राउत ने डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की कहानी को पर्दे पर लाने को लेकर अपने विचार साझा करते हुए कहा, “आज के दौर में, जब सच्चे और निस्वार्थ राजनेता मुश्किल से मिलते हैं, डॉ. कलाम जैसे व्यक्तित्व राजनीति से ऊपर उठकर एक मिशन के रूप में कार्य करते थे। वे शिक्षा, स्वदेशी नवाचार और उत्कृष्टता के प्रतीक थे। उनकी जीवनगाथा को फिल्म के माध्यम से दर्शाना मेरे लिए सिर्फ एक फिल्मी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक गहरी नैतिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। यह कहानी खासतौर पर युवाओं, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के युवाओं को प्रेरित करेगी। मेरे लिए यह अनुभव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय बनने जा रहा है।”





