नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । पिछले पांच सालों में रिया चक्रवर्ती ने काफी संघर्ष किया है। 2020 में अपने एक्स-बॉयफ्रेंड और अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया को जेल का सामना करना पड़ा और उन्हें सोशल मीडिया पर भी बहिष्कार का सामना करना पड़ा। हाल ही में उन्हें इस मामले में CBI से क्लीन चिट मिली, हालांकि सुशांत के परिवार ने इसका विरोध किया। इस पूरे घटनाक्रम ने रिया की मानसिक सेहत पर गहरा असर डाला और उन्हें PTSD जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, रिया का मानना है कि उनके साथ जो कुछ हुआ, उसने लोगों को उनसे जुड़ने में मदद की।
उन्होंने कहा, “मेरे साथ जो कुछ हुआ वह इतना सार्वजनिक था कि बहुत से लोग अपनी परेशानियां मुझसे शेयर करने में कम्फर्टेबल महसूस करने लगे। उन्हें लगा कि मैं मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को समझती हूं। मेरे अपने दोस्तों में से कुछ लड़कियों ने भी अपने पति या परिवार के बारे में मुझसे बात की और मैं उन्हें लगभग 10 सालों से जानती हूं। इतने बड़े स्टिग्मा की वजह से उन्होंने पहले मुझसे यह साझा नहीं किया था। जब उन्हें एहसास हुआ कि मैं भी बुरे दौर से गुजरी हूं, तब जाकर उन्होंने मुझसे खुलकर बात की।”
इस कठिन दौर में रिया ने अपने अनुभव को साझा किया। वह बताती हैं, “मैं हर सुबह उठकर और रात को सोने से पहले उन चीजों के लिए शुक्रगुजार होती थी, जिनके लिए मैं वास्तव में आभारी हूं। कई बार तो ऐसा भी लगता था कि शुक्रगुजार होने के लिए कुछ है ही नहीं, लेकिन फिर मैं सोचती थी कि मैं चल पा रही हूं, मेरे हाथ-पैर काम कर रहे हैं, मेरी आंखें देख रही हैं और इसके लिए मैं कृतज्ञ हूं।”
हनुमान चालीसा से मिली शांति
रिया चक्रवर्ती ने बताया कि उनके लिए हनुमान चालीसा मानसिक शांति और स्थिरता पाने का एक महत्वपूर्ण साधन रही। उन्होंने कहा, “मैंने इसे 2020 में पढ़ना शुरू किया और अब हर दिन कम से कम एक या दो बार, कभी-कभी सात बार तक हनुमान चालीसा पढ़ती हूँ। यह मेरे लिए एक तरह का मेडिटेशन बन गया है।”
इसके अलावा, रिया ने गहरे रिश्तों और दोस्तों के साथ समय बिताने को भी सहायक बताया। उन्होंने कहा, “शेयरिंग सच में एक बहुत पावरफुल टूल है। इसी वजह से मैंने अपना पॉडकास्ट शुरू किया। दूसरों की जिंदगी की यात्राओं को समझने से मुझे बहुत कुछ सीखने और प्रेरणा लेने का मौका मिलता है। लोग बस यह चाहते हैं कि उन्हें समझा जाए। हम सभी कभी न कभी महसूस करते हैं कि हमें देखा या सुना नहीं जाता, और यह अक्सर सच भी होता है। इसलिए अगर हम कोई ऐसी कम्युनिटी ढूंढ लें जो हमें समझती हो और हम भी उनके लिए वैसी ही सहानुभूति दिखा सकें, तो यह वास्तव में इंसानों को एक-दूसरे से जुड़ने और बातचीत करने में मदद करता है।”
मेंटल हेल्थ को लेकर साझा किए विचार
मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं के बारे में समाज में फैली गलतफहमी पर रिया चक्रवर्ती ने कहा: “आज भी समाज का एक बड़ा हिस्सा मानता है कि मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं गंभीर नहीं हैं, सब ठीक हो जाएगा और यह बस एक ड्रामा है। लोग अक्सर कहते हैं, ‘तुम्हें अपने मन पर कंट्रोल करना होगा।’ मरीज अपने मन पर नियंत्रण करना चाहते हैं, लेकिन सच यह है कि असली मानसिक स्वास्थ्य की समस्या या डिसऑर्डर में यह संभव नहीं होता। इसमें एक केमिकल इम्बैलेंस होता है, जिसे कोई व्यक्ति खुद नहीं बना सकता और दुर्भाग्य से आज भी लोग इसे समझते नहीं हैं।”
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