नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय विज्ञापन जगत के सबसे रचनात्मक और प्रेरणादायक चेहरों में से एक, पीयूष पांडे का आज सुबह निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से गंभीर संक्रमण से जूझ रहे थे, जिसके कारण उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे मीडिया, विज्ञापन और कॉर्पोरेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। बताया गया है कि उनका अंतिम संस्कार मुंबई के शिवाजी पार्क में किया जाएगा।
विज्ञापन को अनूठी दृष्टि दी
ओगिल्वी इंडिया (Ogilvy India) से लंबे समय तक जुड़े रहे पीयूष पांडे ने भारतीय विज्ञापन को एक ऐसी अनूठी दृष्टि दी, जिसमें गहरी भावनाएँ, सादगी और देश की मिट्टी की खुशबू थी। उन्होंने ऐसे अनेक कैंपेन बनाए जो न सिर्फ बेहद लोकप्रिय हुए, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक रूप से लोगों को गहराई से छू गए।
बिग बी ने याद किया ‘फेविकोल’ का जादू
पीयूष पांडे के निधन पर सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने X (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक पोस्ट शेयर कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। बिग बी ने फेविकोल के एक पुराने और प्रतिष्ठित विज्ञापन का वीडियो साझा किया, जिसे पीयूष ने अपने भाई प्रसून पांडे के साथ मिलकर बनाया था।
अमिताभ बच्चन ने कैप्शन में लिखा, पांडे ब्रदर्स द्वारा एक शानदार कॉन्सेप्ट और निष्पादन (Execution). पीयूष और प्रसून। शाबाश पीयूष जी। इतना ओरिजनल और प्यारा कोई आश्चर्य नहीं कि आप विश्व चैंपियन हैं।
अंदरूनी खूबसूरती को समझते थे पीयूष
पीयूष पांडे को उनकी रचनात्मकता के लिए जाना जाता था, जिसने हर ब्रांड को भावनाओं से जोड़ दिया। उनके कुछ सबसे मशहूर और सफल अभियानों में शामिल हैं।
‘फेवीकॉल – जोड़े रहने की ताकत’
‘कैडबरी डेयरी मिल्क – कुछ मीठा हो जाए’
‘हर घर कुछ कहता है’
‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’
‘चाय पियो ज़रा मुस्कुरा दो’
शूजीत सरकार ने कहा- भर नहीं पाएंगे यह खालीपन
फिल्म और ऐड डायरेक्टर शूजीत सरकार ने पीयूष पांडे के निधन को इंडस्ट्री के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा, मुझे नहीं पता हम इस खालीपन को कैसे भर पाएंगे। वे विज्ञापन की दुनिया के असली दिग्गज थे। बड़ी मूंछें और हमेशा ज़ोर से हंसने वाले इंसान।शूजीत ने बताया कि उन्होंने पीयूष के साथ कई बड़े प्रोजेक्ट किए, जिनमें गुजरात टूरिज़्म के लिए ‘खुशबू गुजरात की’ और पोलियो, महिला सशक्तिकरण व घरेलू हिंसा पर आधारित सामाजिक अभियान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पीयूष चुपचाप रहकर भी बहुत शानदार और रचनात्मक काम करते थे, जिन्हें हमेशा याद किया जाएगा।फिल्म डायरेक्टर और ऐड फिल्ममेकर आशु तिखा ने भी उन्हें ‘जीनियस’ और ‘लीगेंड’ बताते हुए गहरा शोक व्यक्त किया।
साहित्य और सिनेमा का संगम
पीयूष पांडे सिर्फ़ एक ऐडमैन नहीं थे, बल्कि वे एक बेहतरीन कथाकार थे, जिन्होंने विज्ञापनों में मानवीयता को केंद्र में रखा। उनके विज्ञापनों में अक्सर समाज के लिए एक संदेश और दर्शकों के लिए भरपूर मनोरंजन दोनों दिखाई देते थे। वह जानते थे कि किसी उत्पाद की बात करते हुए भी दिल को छू लेने वाली कहानी कैसे कही जाए। यही कारण था कि उनके बनाए विज्ञापन सिर्फ़ उत्पाद बेचते नहीं थे, बल्कि लोगों को जोड़ते थे और भावनाएँ जगाते थे।
उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, वह एशिया पेसिफिक एडवरटाइजिंग हॉल ऑफ फेम में शामिल होने वाले पहले भारतीय थे। भारतीय विज्ञापन जगत में उनकी मुस्कान, उनके शब्द और उनकी सोच हमेशा एक प्रेरणा बनकर मौजूद रहेगी।





