नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। ओटीटी प्लेटफॉर्म की मोस्ट पॉपुलर सीरीज ‘पंचायत’ का चौथा सीजन दर्शको का मनोरंजन करने एक बार फिर अपने नए कहानी और दो नए किरदार के साथ आ गया है। उन किरदारों के जरिए नया तड़का लगाने की कोशिश की गई है। जिसका चौथा सीजन ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो गया है। और एक बार फिर हमें सचिव जी, प्रधान जी और मंजू देवी की दुनिया में वापस ले गया है लेकिन इन सब के बीच क्या इस हर बार की तरह ही इस बार भी यह सीजन उन उम्मीदों पर खरा उतरा जो पिछले तीन सीजन ने जगाई थीं? जाने इसका रिव्यू।
साल 2020 में जब पहली बार फुलेरा गांव से हमारा परिचय हुआ था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि कैसे यह छोटा सा गांव हमारे दिलों में इतनी गहरी जगह बना लेगा। कि उसके हर किरदार और उनके द्वारा बोले गए डॉयलाग हमारे लिए एक चुटकुला साबित होगें। अब वही एक बार फिर अपने नए चौथे सीजन के साथ लौटा ‘पंचायत’ अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो गया है और एक बार फिर हमें सचिव जी, प्रधान जी और मंजू देवी की की दुनिया में वापस ले गया।
कहानी: चुनावी बवंडर में फंसा फुलेरा
बता दे, इस बार के पंचायत सीजन 4 की शुरुआत वहीं से होती है जहां सीजन 3 का अंत हुआ था। प्रधान जी पर हुए हमले के बाद अब फुलेरा में चुनावी माहौल गरमा गया है। जहां मंजू देवी यानी देवी (नीना गुप्ता) और क्रांति देवी (सुनीता राजवार) के बीच प्रधानी की कुर्सी के लिए कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। जिसमेंएक तरफ लौकी का चुनाव चिह्न लेकर मंजू देवी (नीना गुप्ता) मैदान में है तो दूसरी तरफ प्रेशर कुकर के निशान पर क्रांति देवी उतरी है और सचिव जी (जितेंद्र कुमार) इस बार भी अपने CAT एग्जाम के रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं, साथ ही बनराकस पर हाथ उठाने के केस की चिंता भी सता रही है। रिंकी (सांविका) के साथ उनकी लव स्टोरी भी इस सीजन में नई मंजिल की तरफ बढ़ती दिखाई देती है।
एक्टिंग: पुरानी टीम, वही जादू
इस बार पुरानी टीम में वही जादू है। जिसमें जितेंद्र कुमार (सचिव जी) एक बार फिर अपने किरदार में पूरी तरह रम गए हैं। सचिव जी का किरदार अब उनकी दूसरी प्रकृति बन चुका है। इस सीजन में उन्हें थोड़ा एक्शन मोड में भी देखा गया है।
नीना गुप्ता (मंजू देवी)
नीना गुप्ता का अभिनय इस सीजन में भी शानदार है। जिसमें वे चुनावी माहौल में नई ऊंचाइयों को छू रही है।
रघुबीर यादव (प्रधान जी)
रघुबीर यादव यानी (प्रधान जी) का प्रदर्शन हमेशा की तरह दमदार है जिसमें गोली लगने के बाद के दर्द और चुनावी दबाव को वह बेहद प्रभावी तरीके से पेश करते हैं।
सपोर्टिंग कास्ट
दुर्गेश कुमार (बनराकस), फैजल मलिक (प्रहलाद चा) और सुनीता राजवार (क्रांति देवी) ने अपने किरदारों को पूरी ईमानदारी से निभाया है। इसमें विशेष रूप से दुर्गेश कुमार का अभिनय सीजन में काफी प्रभावशाली रहा है।
राइटिंग और डायरेक्शन:
इस सीजन की लेखनी चंदन कुमार ने हमेशा की तरह उतनी धारदार नहीं लिखी जितनी पहले के सीजन में थी। पहले के सीजन में छोटे-छोटे संवाद भी गहरी बात कह जाते थे, लेकिन इस बार वैसी बात नहीं बन पाई, दीपक कुमार मिश्रा और अक्षत विजयवर्गीय के निर्देशन में माहौल तो बना लेकिन, कहानी में वह अच्छी गठन नहीं दिखी जो इस शो की खासियत रही है।





