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Monday, March 2, 2026
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Kavita Krishnamurthy Birthday: 15,000 से भी ज्यादा गया गाना , जानें कैसा रहा सिंगर का करियर

कविता कृष्णमूर्ति ने 15 हजार गानों की धारा में अपनी आवाज का जादू बिखेरा, पद्मश्री और कई अवॉर्ड्स से सम्मानित यह गायिका आज भी संगीत जगत की चमकती हस्ती हैं।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कविता कृष्णमूर्ति भारतीय संगीत की बेहतरीन गायिकाओं में गिनी जाती हैं। उनका असली नाम शारदा कृष्णमूर्ति है, लेकिन वे कविता के नाम से जानी जाती हैं। 25 जनवरी 1958 को दिल्ली में जन्मी कविता ने महज 9 साल की उम्र में लता मंगेशकर के साथ अपना पहला बांग्ला गाना गाया, जिसके बाद उन्होंने गायिका बनने का सपना देखना शुरू किया। आज उनके नाम 15 हजार से अधिक गाने दर्ज हैं, जो उनके संगीत करियर की चमकदार मिसाल हैं।

विज्ञापनों में मिली पहला बड़ा मौका

कविता कृष्णमूर्ति ने मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज से पढ़ाई की और इस दौरान कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया करती थीं। एक कार्यक्रम में मन्ना डे ने उनका गायन सुना और इसके बाद उन्हें विज्ञापनों में गाने का अवसर मिला, जिससे उनके संगीत करियर की शुरुआत और मजबूती मिली।

‘मिस्टर इंडिया’ से मिला बड़ा ब्रेक

कविता कृष्णमूर्ति ने अपने करियर की शुरुआत 1980 में फिल्म ‘मांग भरो सजना’ के गाने से की, जो फिल्म से हटा दिया गया था। इसके बाद 1985 में उन्होंने फिल्म प्यार झुकता नहीं में प्लेबैक सिंगिंग की। लेकिन उन्हें असली पहचान मिस्टर इंडिया (1987) में अनिल कपूर और श्रीदेवी के लिए गाए गए सुपरहिट गाने ‘हवा हवाई’ और ‘करते हैं हम प्यार मिस्टर इंडिया’ से मिली। इन दोनों गानों की सफलता के बाद कविता का करियर ऊँचाईयों पर पहुंचा। उन्होंने आनंद-मिलिंद, उदित नारायण, ए.आर. रहमान जैसे संगीतकारों के साथ भी बेहतरीन काम किया।

कविता कृष्णमूर्ति को मिले कई प्रतिष्ठित पुरस्कार

कविता कृष्णमूर्ति को उनके संगीत करियर के लिए 2005 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्होंने चार फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर अवॉर्ड्स भी जीते। उन्हें स्टारडस्ट मिलेनियम 2000 अवॉर्ड में ‘बेस्ट सिंगर ऑफ द मिलेनियम’ का सम्मान और फिल्म देवदास के गाने ‘डोला रे डोला’ के लिए जी सिने 2003 अवॉर्ड भी मिला। ये पुरस्कार उनके बेहतरीन गायन और संगीत के क्षेत्र में योगदान की पुष्टि करते हैं।

बेंगलुरु में म्यूजिक संस्थान की शुरुआत

कविता कृष्णमूर्ति ने 1999 में डॉ. एल. सुब्रमण्यम से शादी की। उनकी कोई संतान नहीं है, लेकिन उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर बेंगलुरु में सुब्रमण्यम एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स नामक म्यूजिक संस्थान की स्थापना की। यह संस्थान संगीत की शिक्षा और नई प्रतिभाओं को मंच देने का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

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