नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। दिलीप कुमार अपने जमाने के सुपरस्टार और ट्रेजडी किंग हिंदी सिनेमा के वो सितारे हैं जो आज भले इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन अपने किरदारों के जरिए वो आज भी दर्शकों और अपने प्रशंसकों के दिलों में जिंदा हैं। किंग दिलीप कुमार ने अपनी एक्टिंग से करोड़ों लोगों का दिल जीता है। आज उनके जन्मदिन के दिन चलिए कुछ खास दिलचस्प बातों के बारे में जानते हैं ।
दिलीप कुमार उन चुनिंदा सितारों में से थे, जिन्होंने जीते जी तो दर्शकों को अपना दीवाना बनाए ही रखा साथ ही इस दुनिया से जाने के बाद भी उनकी लोकप्रियता कायम है।
अपने लंबे फिल्मी करियर में अभिनेता ने कई हिट, सुपरहिट फिल्में दीं। दिलीप कुमार को लेकर एक बात मशहूर थी कि उन्होंने हमेशा उन फिल्मों पर फोकस किया जो उनकी अभिनय क्षमता के साथ न्याय कर सकें। दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसंबर 1922 को ब्रिटिश राज के दौरान पेशावर जो अब पाकिस्तान में है वहां हुआ। उनका असली नाम मोहम्मद युसुफ खान था, जो पेशावर से पुणे ड्राई फ्रूट की सप्लाई करने आए थे। दिलीप कुमार की शुरुआत से ही एक्टिंग में दिलचस्पी थी, ऐसे में जैसे ही उनके हाथ अभिनय का मौका लगा अपने पिता की मर्जी के खिलाफ जाकर एक्टिंग का रास्ता चुना। जिसमें उनकी पहली फिल्म ‘ज्वार भाटा’ थी। फिल्म निर्माता ने ही उन्हें दिलीप कुमार नाम दिया, जो आगे चलकर उनकी पहचान बन गया।
फिल्मों में आते ही गाड़े सफलता के झंडे
फिल्मों में आते ही उन्होनें अपने काबिलियत के दम पर सफलता के झंडे गाड़ना शुरू कर दिया। अपने करियर में उन्होंने ‘अंदाज’,’बाबुल’, ‘दीदार’, ‘मुगल-ए-आजम’, ‘नया दौर’, ‘राम और श्याम’ और ‘गंगा जमुना’ जैसी एक से बढ़कर एक फिल्में दी। शुरुआती दौर में ही उन्होंने ऐसी फिल्में दीं जिन्होंने उन्हें करियर की बुलंदियों पर पहुंचा दिया। सब ठीक चल रहा था, लेकिन फिर अचानक ऐसा क्या कुछ हुआ जो उन्हें ‘ट्रेजेडी किंग’ कहा जाने लगा था।
दिलीप कुमार को क्यों कहा गया ट्रेजेडी किंग?
कई एक्टर,एक्ट्रेस के मुहं से आपने ये कहते सुना होगा कि, उनके निभाए किरदारों का असर खुद पर पड़ने लगा। दिलीप कुमार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। पचास के दशक में अभिनेता का स्टारडम अपने चरम पर था। दरअसल, पचास के दशक में अभिनेता दिलीप कुमार ने जिन भी फिल्मों में काम किया, उनमें उन्होंने गंभीर किरदार निभाए थे। जिसके चलते उनका नाम ट्रेजेडी किंग पड़ गया। जिन फिल्मों ने एक्टर को कामयाबी दी उन्हीं के चलते वह काफी समय डिप्रेशन में भी रहने लगे। जिसका खुलासा उन्होंने खुद किया था।
जब साइकेट्रिस्ट से बात करने की नौबत आ गई
दिलीप कुमार के साथ एक दौर तब भी आया जब उन्हें साइकेट्रिस्ट से कंसल्ट करना पड़ा था। साइकेस्ट्रिस्ट ने उन्हें सलाह दी की उन्हें कॉमेडी फिल्में करनी चाहिए, ताकि वह उन गंभीर किरदारों से उबर पाएं। बहुत समय बाद वे अपने निभाएं किरदार से वापस नॉमर्ल लाइफ जीने में कामयाब हुए थे।





