नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को अभिनेता परेश रावल अभिनीत फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ की रिलीज और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) द्वारा दिए गए प्रमाणन को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। जहां कोर्ट ने टिप्पणी की कि, मामले की तत्काल सुनवाई की कोई आवश्यकता नहीं है, और इसलिए उसने इस पर जल्द विचार करने से मना कर दिया।
याचिकाकर्ता की मुख्य दलीलें
याचिकाकर्ता, अधिवक्ता शकील अब्बास, ने कोर्ट से फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने और CBFC प्रमाण पत्र रद्द करने की मांग की थी। याचिका की मुख्य चिंताएँ और आरोप निम्नलिखित हैं। याचिका में तर्क दिया गया कि फिल्म ऐतिहासिक तथ्यों को विकृत करती है। आरोप है कि,फिल्म ताजमहल के मूल से जुड़ी एक ‘फ्रिंज थ्योरी’ को पुनर्जीवित कर रही है, जिसके अनुसार ताजमहल मूल रूप से एक हिंदू मंदिर था। इस दावे को कई मुख्यधारा के इतिहासकारों ने खारिज कर दिया है।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि फिल्म के विवादास्पद चित्रण से सांप्रदायिक अशांति फैलने और देशव्यापी तनाव पैदा होने का गंभीर खतरा है। याचिका में आरोप लगाया गया कि फिल्म गलत और भ्रामक जानकारी फैलाकर एक राजनीतिक रूप से प्रेरित एजेंडे को बढ़ावा दे रही है। याचिका के अनुसार, फिल्म में ऐसे दृश्य शामिल हैं जो विभाजनकारी हो सकते हैं और समुदायों के बीच तनाव भड़का सकते हैं।
फिल्म का विवरण और मांगें
रिलीज़ की तिथि: फिल्म का ट्रेलर 16 अक्टूबर को जारी हुआ था, और यह फिल्म 31 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है, जो सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती और इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि के साथ मेल खाती है।याचिका में शामिल पक्ष: याचिका में केंद्र सरकार, CBFC, फिल्म के निर्माता, निर्देशक और अभिनेता परेश रावल को भी पार्टी बनाया गया है।अब्बास ने मांग की है कि CBFC फिल्म की पुनः जांच करे, एक डिस्क्लेमर जोड़े, और कुछ आपत्तिजनक दृश्यों को हटाए।याचिकाकर्ता ने चेतावनी दी कि इस तरह के चित्रण से यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल ताजमहल की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुँच सकता है।





