नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। एस डी बर्मन का हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बहुत बड़ा योगदान रहा है। वह एक ऐसे संगीतकार थे जिन्होंने अपने संगीत से लोगों पर गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने अपने करियर में 100 से ज्यादा फिल्मों के लिए संगीत दिया। एसडी बर्मन ने लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, किशोर कुमार और मुकेश जैसे गायक कलाकारों के करियर को भी ऊंचाई पर पहुंचाया। उन्होंने 31 अक्टूबर 1975 को इस दुनिया को छोड़ा, लेकिन उनके बेहतरीन गाने आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। आइए जानते हैं एसडी बर्मन से जुड़ी कुछ खास बातें।
करीबी लोग बर्मन को कंजूस कहते थे
एसडी बर्मन के किस्से भी बहुत प्रसिद्ध थे। उन्हें लोग कंजूस कहते थे। एक बार जब वह मंदिर जाते थे, तो वह कभी भी अपनी दोनों चप्पलें एक साथ नहीं उतारते थे। उन्होंने कहा कि आजकल चप्पल चोरी होने की घटनाएं बढ़ गई हैं। जब एक दोस्त ने पूछा कि अगर चोर ने दोनों चप्पलें खोज लीं तो? उन्होंने मजाक में कहा कि अगर चोर इतनी चप्पलों में से दोनों चप्पल खोज लेता है, तो वह सच में इसका हकदार है। इस तरह से एसडी बर्मन एक अनोखी शख्सियत के मालिक थे।
सचिव देव बर्मन था असली नाम
एस डी बर्मन असली नाम सचिव देव बर्मन था। वह एक शाही परिवार से थे, लेकिन बहुत साधारण जीवन जीते थे। उनकी मां का नाम निर्मला देवी था जो मणिपुर की राजकुमारी थीं और पिता एमआरएन देव बर्मन त्रिपुरा के महाराज के बेटे थे।
रेडियो स्टेशन पर गायक के रूप में कार्य किया
एसडी बर्मन ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और 1932 में कोलकाता रेडियो स्टेशन पर गायक के रूप में काम करना शुरू किया। उन्होंने संगीत की शुरुआत सितार वादन से की, फिर बांग्ला फिल्मों और हिंदी फिल्मों की ओर बढ़े। 1944 में वे मुंबई आए और 1946 में फिल्म “शिकारी” के लिए संगीत दिया। इसके बाद उनकी सफलता की कहानी शुरू हुई।
“मेरा सुंदर सपना” से करियर तेजी से आगे बढ़ा
साल 1947 में सचिनदेव ने फिल्म “दो भाई” के लिए म्यूजिक दिया था। इस फिल्म का गाना “मेरा सुंदर सपना बीत गया” बहुत प्रसिद्ध हुआ, जिसे गीता दत्त ने गाया। इसके बाद सचिन देव का करियर तेजी से बढ़ा और उन्होंने आगे कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने 30 साल के फिल्मी करियर में उन्होंने लगभग 90 फिल्मों के लिए संगीत दिया। उनका सबसे ज्यादा काम गीतकार साहिर लुधियानवी के साथ हुआ।
क्या सचिन देव को कोमा में रहना पड़ा था?
फिल्म “मिली” की रिकॉर्डिंग के दौरान सचिन देव को स्ट्रोक आया और वह लगभग 6 महीने तक कोमा में रहे। इसी दौरान, क्लब ईस्ट बंगाल ने आईएफ शील्ड फाइनल में मोहन बगान को 5-0 से हरा दिया। उनके बेटे राहुल देव बर्मन ने यह खबर उनके कान में चिल्लाकर बताई जिससे उन्होंने अपनी आंखें खोलीं। लेकिन उसके बाद वह फिर कभी नहीं जागे और 31 अक्टूबर को इस दुनिया को छोड़कर चले गए।





