नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । बॉलीवुड की बेहतरीन अभिनेत्रियों में शुमार कोंकणा सेन शर्मा आज अपना जन्मदिन मना रही हैं। अपने सहज अभिनय, मजबूत संवाद अदायगी और अलग हटकर किरदारों के लिए पहचान बनाने वाली कोंकणा ने हर बार साबित किया है कि वह किसी भी भूमिका को अपनी विशिष्ट शैली से यादगार बना सकती हैं। बाल कलाकार के रूप में फिल्मी सफर शुरू करने वाली कोंकणा ने 1983 की फिल्म ‘इंदिरा’ से पर्दे पर कदम रखा था। समय बीतने के साथ उन्होंने जिस भी भूमिका को निभाया, उसे सच्चाई और गहराई से दर्शकों तक पहुंचाया। नेशनल अवॉर्ड अपनी झोली में डालने वाली कोंकणा आज उन चंद अभिनेत्रियों में शामिल हैं जो अपनी स्क्रिप्ट और किरदारों की पसंद को लेकर बेहद सजग रहती हैं।
‘तलवार’: मां के दर्द को परदे पर सजीव किया
वर्ष 2008 के चर्चित नोएडा डबल मर्डर केस पर आधारित फिल्म ‘तलवार’ में कोंकणा ने एक ऐसी मां की भूमिका निभाई, जो जांच के बदलते नजरियों में कभी संदिग्ध, तो कभी पीड़ित के तौर पर सामने आती है। इरफान खान और नीरज काबी जैसे धुरंधरों के बीच भी कोंकणा ने अपनी शांत लेकिन प्रभावशाली अदाकारी से फिल्म को मजबूत आधार दिया।
‘ओमकारा’: इंदु त्यागी के रूप में झलक गई गांव की सादगी
विशाल भारद्वाज की चर्चित फिल्म ‘ओमकारा’ में कोंकणा ने इंदु त्यागी का किरदार निभाया-एक ऐसी गांव की महिला, जिसकी मासूमियत और दृढ़ता दोनों ही दर्शक लंबे समय तक नहीं भूलते। भूमिका के लिए उन्होंने ग्रामीण बोली, व्यवहार और शरीर-भाषा पर जिस तरह पकड़ बनाई, उसने उन्हें फिल्म की सबसे उल्लेखनीय अदाकारियों में शामिल कर दिया।
प्रारंभिक फिल्मों में दिखी बेहतरीन अभिव्यक्ति
करियर की शुरुआती फिल्मों में कोंकणा ने एक तमिल ब्राह्मण महिला के किरदार में जबरदस्त अभिव्यक्ति दिखाई। कई दृश्यों में वह बिना संवाद के केवल हाव-भाव से भावनाओं को व्यक्त करती हैं-गर्व, दर्द, खुशी… सब कुछ एक-एक फ्रेम में साफ झलकता है। यही कोंकणा की विशिष्ट अदाकारी का सबसे बड़ा प्रमाण है।
‘पेज 3’: महत्वाकांक्षी पत्रकार बन छा गईं
कोंकणा की सबसे चर्चित भूमिकाओं में से एक है मधुर भंडारकर की फिल्म ‘पेज 3’। इसमें उन्होंने ग्लैमर इंडस्ट्री की चकाचौंध और अंधेरे सच के बीच संघर्ष करती एक महत्वाकांक्षी पत्रकार का किरदार निभाया। यह फिल्म अपने दौर से आगे थी और रिलीज के बाद इसे तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाज़ा गया। बोमन ईरानी, अतुल कुलकर्णी और संध्या मृदुल जैसे कलाकारों के बीच भी कोंकणा पूरे आत्मविश्वास के साथ केंद्र में रहीं।
‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’: शिरीन के किरदार में महिलाओं की लड़ाई को आवाज
अलंकृता श्रीवास्तव की बहुचर्चित फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ में कोंकणा ने शिरीन की भूमिका निभाई-एक ऐसी महिला जो घरेलू उत्पीड़न, अपमानजनक पति और बार-बार हुए गर्भपातों के बीच भी एक बेहतर जीवन का सपना देखती है।
यह फिल्म चार महिलाओं की आजादी की तलाश की कहानी है, जिसमें कोंकणा सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरती हैं। रत्ना पाठक शाह, अहाना कुमरा और प्लाबिता बोरठाकुर के साथ उनकी अभिनय के लिए खूब सराहना हुई।
कोंकणा-डायरेक्टर्स की पहली पसंद
जिन निर्देशकों को दमदार और संवेदनशील किरदारों की तलाश रहती है, उनकी पहली पसंद हमेशा कोंकणा रही हैं। वह अपने किरदारों में न केवल डूब जाती हैं, बल्कि उन्हें एक ऐसा जीवन देती हैं, जिसे दर्शक बखूबी महसूस कर सकें। अपने करियर के हर पड़ाव पर कोंकणा सेन शर्मा ने साबित किया है कि वह केवल अभिनेत्री नहीं, बल्कि एक संवेदनशील कलाकार हैं, जो भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान रखती हैं।




