नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। आज मशहूर लेखक, गीतकार और शायर जावेद अख्तर अपना जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने अपनी कलम से हिंदी सिनेमा को एक नई सोच, नई भाषा और नया तेवर दिया। शोले, दीवार, जंजीर जैसी फिल्मों के दमदार संवाद हों या फिर दिल को छू लेने वाले गीत-जावेद अख्तर का नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। पांच नेशनल फिल्म अवॉर्ड, पद्मश्री और पद्मभूषण जैसे बड़े सम्मानों से नवाजे जा चुके जावेद अख्तर आज करीब 167 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं, लेकिन उनकी यह चमकदार सफलता बेहद दर्दनाक संघर्षों से होकर गुजरी है।
मुंबई आने का सपना और कड़वी हकीकत
डॉक्यू-सीरीज़ ‘एंग्री यंग मेन’ में जावेद अख्तर ने अपने शुरुआती दिनों के संघर्षों को याद करते हुए बताया था कि ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने मुंबई आने का फैसला किया था। उनका सपना था कि वह गुरु दत्त या राज कपूर के साथ सहायक निर्देशक के रूप में काम करेंगे और कुछ सालों में निर्देशक बन जाएंगे। लेकिन सपनों के शहर मुंबई ने उन्हें सबसे पहले संघर्ष का कड़ा सबक दिया।
रेलवे स्टेशन, पार्क और बेंच बने ठिकाने
जावेद अख्तर ने बताया कि वह महज पांच दिन अपने पिता के घर रहे और उसके बाद दोस्तों के सहारे जिंदगी काटने लगे। कई बार रेलवे स्टेशन, पार्क, स्टूडियो के गलियारे और बेंच ही उनका घर बन गए। हालात इतने खराब थे कि दादर से बांद्रा तक पैदल चलना पड़ता था क्योंकि बस का किराया देने तक के पैसे नहीं होते थे। कई बार ऐसा भी हुआ कि दो-दो दिन तक उन्होंने कुछ खाया ही नहीं।
भूख और नींद की पीड़ा आज भी याद
जावेद अख्तर ने भावुक होते हुए कहा था कि जिंदगी में दो तरह की वंचनाएं होती हैं-नींद की और भोजन की-और ये ऐसी होती हैं, जिन्हें इंसान कभी नहीं भूल पाता। आज जब वह फाइव स्टार होटलों के बड़े कमरों में रुकते हैं, तो उन्हें वो दिन याद आते हैं जब वह थर्ड क्लास डिब्बे में भी ठीक से बैठ नहीं पाते थे।
पत्नी शबाना आज़मी ने सुनाया दर्दनाक किस्सा
जावेद अख्तर की पत्नी और मशहूर अभिनेत्री शबाना आज़मी ने भी उनके संघर्ष का एक किस्सा साझा किया था। उन्होंने बताया कि एक दिन जावेद को एहसास हुआ कि उन्होंने तीन दिनों से कुछ खाया नहीं है। तब उन्होंने खुद से कहा था-“मैं इस तरह नहीं मरूंगा, वक्त बदलेगा।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
जावेद अख्तर ने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब उनके पास पहनने के लिए सिर्फ एक ही पैंट बची थी और रहने के लिए कोई कमरा नहीं था। आज वही शख्स करोड़ों की संपत्ति का मालिक है और भारतीय सिनेमा का मजबूत स्तंभ माना जाता है। उनकी जिंदगी इस बात का सबूत है कि हालात चाहे जैसे भी हों, हौसला और मेहनत इंसान को जमीन से उठाकर आसमान तक पहुंचा सकती है।





