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Tuesday, March 3, 2026
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Birthday Special: रिजेक्शन से राइजिंग तक, कैसे बनी बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी

तमिल सिनेमा से रिजेक्ट होने वाली हेमा मालिनी ने मेहनत और प्रतिभा के दम पर बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ बनकर पहचान बनाई। 76 साल की उम्र में भी वे कला, राजनीति और समाजसेवा में समान जोश के साथ सक्रिय हैं।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सादगी, सौंदर्य और अदाकारी का अद्भुत संगमयही पहचान है बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी की। 16 अक्टूबर 1948 को तमिलनाडु के श्रीरामपट्टनम गांव में जन्मीं मालनी आज अपना जन्मदिन मना रही हैं। चार दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक यादगार किरदार दिए हैं। अभिनय, नृत्य, निर्देशन और राजनीति हर क्षेत्र में हेमा ने अपनी अलग पहचान बनाई है।

धार्मिक परिवार में जन्म, बचपन से थी कला की ओर रुचि

हेमा मालिनी का जन्म एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनकी मां जया चक्रवर्ती दक्षिण भारतीय फिल्मों की जानी-मानी प्रोड्यूसर थीं। घर में धार्मिक माहौल था, और मां लक्ष्मी जी की भक्त हेमा को शुरू से ही शास्त्रीय नृत्य की शिक्षा दी गई। उन्होंने भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी और ओडिसी में महारत हासिल की। बचपन से ही मंच पर नृत्य प्रस्तुति देना उनका शौक बन गया।

तमिल फिल्म से हुई शुरुआत, मगर झेलना पड़ा रिजेक्शन

हेमा मालिनी के करियर की शुरुआत तमिल सिनेमा से होने वाली थी। 1961 में उन्हें एक तमिल फिल्म में मौका मिला, लेकिन उनकी पतली-दुबली काया और मासूम चेहरे के कारण निर्देशक ने उन्हें एक्ट्रेस बनने लायक नहीं कहकर रिजेक्ट कर दिया। यह झटका बड़ा था, लेकिन हेमा ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी मेहनत से खुद को साबित करने की ठान ली।

‘सपनों के सौदागर’ से बॉलीवुड में डेब्यू

किस्मत ने जल्द ही करवट ली। 1969 में राज कपूर के साथ फिल्म ‘सपनों के सौदागर’ से हेमा मालिनी ने बॉलीवुड में कदम रखा। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं कर पाई, लेकिन हेमा की अदाकारी और स्क्रीन प्रेजेंस ने सबका ध्यान खींच लिया। इसके बाद 1970 में आईं उनकी तीन फिल्में ‘तुम हसीन मैं जवान’, ‘अभिनेत्री’ और ‘जॉनी मेरा नाम’ सुपरहिट साबित हुईं। यही वह दौर था जब इंडस्ट्री ने उन्हें ‘ड्रीम गर्ल’ कहना शुरू किया।

‘सीता और गीता’ ने बना दिया सुपरस्टार

1972 में आई फिल्म ‘सीता और गीता’ हेमा मालिनी के करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। फिल्म में उन्होंने डबल रोल निभाया एक सीधी-सादी सीता और दूसरी बेफिक्र गीता। दोनों किरदारों को जिस बारीकी से उन्होंने जिया, उसने दर्शकों का दिल जीत लिया। फिल्म सुपरहिट रही और हेमा मालिनी ने खुद को बॉलीवुड की टॉप हीरोइनों की कतार में स्थापित कर लिया।

हर किरदार में ढलीं ‘ड्रीम गर्ल’

हेमा मालिनी के अभिनय की खासियत रही कि उन्होंने हर किरदार को अपने व्यक्तित्व से जोड़ दिया। ‘शोले’ की चुलबुली बसंती, ‘खुशबू’ की संवेदनशील कुसुम, ‘मीरा’ की भक्त साधिका या फिर ‘स्वामी विवेकानंद’ में मां दुर्गा का गंभीर रूप हेमा हर रोल में फिट रहीं। उनकी डांसिंग स्किल और भावनात्मक अभिव्यक्ति ने उन्हें ‘ब्यूटी विद टैलेंट’ का प्रतीक बना दिया।

धर्मेंद्र संग प्रेम कहानी बनी चर्चा का विषय

सफल करियर के साथ हेमा मालिनी की निजी जिंदगी भी सुर्खियों में रही। फिल्मों के सेट पर धर्मेंद्र के साथ उनकी मुलाकात हुई और धीरे-धीरे दोनों करीब आए। उस समय धर्मेंद्र शादीशुदा थे और चार बच्चों के पिता भी, लेकिन हेमा ने अपने दिल की सुनी और उनसे विवाह किया। दोनों ने 1980 में शादी की और आज भी यह जोड़ी बॉलीवुड की सबसे सम्मानित जोड़ियों में गिनी जाती है। उनकी दो बेटियां ईशा देओल और अहाना देओल भी कला के क्षेत्र से जुड़ी हैं।

राजनीति में भी बनाया मजबूत मुकाम

अभिनय और नृत्य के बाद हेमा मालिनी ने राजनीति में भी कदम रखा। वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़ीं और राज्यसभा की सदस्य रहीं। बाद में मथुरा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और लगातार तीन बार जीत दर्ज की। हेमा आज भी मथुरा की जनता के बीच लोकप्रिय हैं और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।

अवॉर्ड्स और सम्मान

हेमा मालिनी को कला और समाज के क्षेत्र में योगदान के लिए कई सम्मान मिले। 2000 में उन्हें पद्म श्री से नवाजा गया। इसके अलावा उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड, एनटीआर अवॉर्ड, और डांस एवं थियेटर में योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले।

कला के प्रति आज भी समर्पित

76 वर्ष की आयु में भी हेमा मालिनी का कला से रिश्ता उतना ही जीवंत है। वे आज भी भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी के मंचों पर प्रस्तुति देती हैं। हाल ही में उन्होंने वृंदावन में आयोजित राधा-कृष्ण नृत्य नाटिका में हिस्सा लिया था। उनकी लगन, अनुशासन और निष्ठा आज की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं।

हेमा मालिनी का जीवन इस बात की मिसाल है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत होती है। तमिल सिनेमा में रिजेक्ट होने से लेकर बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ बनने तक का उनका सफर मेहनत, विश्वास और प्रतिभा की मिसाल है। उम्र चाहे जो भी हो, हेमा मालिनी आज भी उतनी ही गरिमामयी और प्रेरक हैं, जितनी पहली बार पर्दे पर आई थीं।

रिजेक्शन से शुरू हुआ सफर, कला के समर्पण तक पहुंचा। 76 वर्ष की उम्र में भी हेमा मालिनी न सिर्फ बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ हैं, बल्कि भारतीय नारी की दृढ़ता और सौंदर्य की सजीव प्रतीक भी हैं।

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