नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक और निर्माता महेश भट्ट आज, 20 सितंबर को अपना 75वां बर्थडे मना रहे है आशिकी 2, सड़क, दिल है कि मानता नहीं जैसी हिट फिल्में बनाने वाले महेश भट्ट अपनी प्रोफेशनल के साथ-साथ पर्सनल लाइफ के लिए भी हमेशा ही सुर्खियों में रहे हैं। आज उनके जन्मदिन के अवसर पर जानेगें वह किस्सा जब 19 साल की उम्र में वह घर से इस बात पर निकल गए थे कि मां ने उन्हें पैसे कमाए बिना घर लौटने से मना कर दिया था। साफ शब्दों में कह दिया था कि पैसे ना कमा पाए तो घर वापस ना आए।
बता दे कि, महेश भट्ट जिनकी अपनी प्रोफेशनल के साथ-साथ पर्सनल लाइफ भी हमेशा ही सुर्खियों में रही है एक ऐसा ही अफेयर महेश भट्ट का एक्ट्रेस परवीन बॉबी के साथ रहा। 70 के दशक में दोनों के बीच प्यार इस कदर परवान चढ़ा था कि इस रिश्ते की चर्चा हर ओर थी।
20 सितंबर को बॉलीवुड के जाने-माने निर्देशक और निर्माता महेश भट्ट अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं। एक ऐसे शख्स की कहानी, जो बचपन से लेकर आज तक संघर्ष, हिम्मत और कड़ी मेहनत की मिसाल बना है। महेश भट्ट ने न केवल फिल्मों के जरिये अपने दिल की आवाज़ दुनिया तक पहुंचाई, बल्कि अपने कामयाबी के सफर से लाखों युवाओं को भी प्रेरित किया।
बचपन से शुरू हुआ संघर्ष मां की सख्त हिदायत
महेश भट्ट के पिता नानाभाई भट्ट भी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े थे, लेकिन उनका निजी जीवन काफी जटिल था। महेश भट्ट को बचपन में ‘नाजायज’ कहे जाने जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। 19 साल की उम्र में जब महेश ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए घर छोड़ने का फैसला किया, तब उनकी मां शिरीन मोहम्मद अली ने उनसे कहा, “पैसे लेकर घर आना, नहीं तो घर मत आना।” यह सख्त हिदायत उनकी ज़िंदगी का पहला बड़ा मोड़ साबित हुई। यह लाइन आज भी उनके संघर्ष की ताकत बनकर उनके साथ है।
मुंबई में संघर्ष की शुरुआत झूठ से मिली पहली नौकरी
1968-69 के दौर में मुंबई आने के बाद महेश भट्ट सीधे महबूब स्टूडियो के गेट पर पहुंच गए। जब स्टूडियो का वॉचमैन उन्हें अंदर जाने से रोक रहा था, तो महेश ने झूठ बोला कि वे राज खोसला से मिलने आए हैं। यह झूठ उनके करियर की पहली सीढ़ी साबित हुआ। राज खोसला ने जब उनसे पूछा कि क्या उन्हें फिल्म मेकिंग आती है, तो महेश ने ईमानदारी से कहा कि उन्हें नहीं आती। इस सच्चाई ने राज खोसला को प्रभावित किया और उन्होंने महेश को अपना असिस्टेंट बना लिया।महेश भट्ट ने राज खोसला की फिल्म ‘आग’ (1979) में भी काम किया, जिसने उन्हें फिल्म निर्माण की बारीकियाँ समझाने में मदद की।
पहली फिल्म ‘मंजिलें और भी हैं’ उम्मीदों की उड़ान
26 साल की उम्र में महेश भट्ट ने ‘मंजिलें और भी हैं’ से निर्देशन की शुरुआत की। हालांकि यह फिल्म कमर्शियल हिट नहीं रही, लेकिन इसने उन्हें निर्देशक के रूप में पहचान दिलाई। इसके बाद ‘लहू के दो रंग’, ‘दस्तक’, ‘सर’ जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
‘आशिकी’ संगीत की क्रांति और बॉक्स ऑफिस का धमाका
1987 में आई फिल्म ‘आशिकी’ ने महेश भट्ट के करियर को नई ऊंचाई पर पहुंचाया। इस फिल्म के गाने आज भी सुनने वालों के दिलों को छू जाते हैं। शुरुआत में कई क्रिटिक्स ने इस फिल्म को सफल नहीं माना था, लेकिन महेश ने हार नहीं मानी। फिल्म के संगीत निर्देशक नीलम मेहता और भट्टी की मेहनत रंग लाई और ‘आशिकी’ सुपरहिट साबित हुई। ‘आशिकी’ के गाने ‘दिल में कहीं’ और ‘तुम मिले’ को आज भी हिंदी फिल्मों के सबसे यादगार गीतों में गिना जाता है।
‘जख्म’ एक पिता-पुत्र की कहानी और निजी जज़्बात
1998 में महेश भट्ट ने ‘जख्म’ का निर्देशन किया, जो उनकी और उनके पिता नानाभाई भट्ट के रिश्ते की जटिलताओं पर आधारित थी। फिल्म में उनकी खुद की जिंदगी के कई पहलू देखने को मिलते हैं। यह फिल्म दर्शकों के साथ-साथ आलोचकों के बीच भी बेहद पसंद की गई। ‘जख्म’ ने कई पुरस्कार भी जीते और महेश भट्ट की निर्देशक के रूप में छवि को मजबूत किया।
परिवार के साथ बिजनेस में भी सफलता
महेश भट्ट आज ‘विशेष फिल्म्स’ के सह-मालिक हैं, जो बॉलीवुड के प्रमुख प्रोडक्शन हाउस में शुमार है। उनकी कुल संपत्ति लगभग 373 करोड़ रुपये आंकी गई है।महेश भट्ट के बेटे राहुल भट्ट और पूजा भट्ट भी फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं, और महेश भट्ट नए कलाकारों को लॉन्च करने में भी मदद करते हैं।सालाना उनकी कमाई लगभग 36 करोड़ रुपये है, जो उनके अनुभव और लोकप्रियता का प्रमाण है।
सोशल मीडिया और नई पीढ़ी को प्रोत्साहन
महेश भट्ट आज सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं। वे युवा कलाकारों और फिल्ममेकर्स को लगातार प्रोत्साहित करते हैं और अपने अनुभव साझा करते हैं। उनका मानना है कि सच्चाई और ईमानदारी से ही फिल्म इंडस्ट्री में टिके रहना संभव है।
प्रेरणा का स्रोत संघर्ष से सफलता तक
महेश भट्ट की जिंदगी संघर्ष, सच्चाई और लगन की मिसाल है। उनकी मां की सख्त हिदायत, पिता की जटिलता, खुद की मेहनत और ईमानदारी ने उन्हें बॉलीवुड की बुलंदी पर पहुंचाया। उनकी कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को सच करना चाहता है।
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