नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। मनोज बाजपेयी की अपकमिंग फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ अपने टाइटल को लेकर विवादों में घिर गई है। जैसे ही फिल्म का टीज़र रिलीज हुआ, ब्राह्मण समाज ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। आरोप है कि फिल्म के नाम में इस्तेमाल किया गया शब्द पूरे समुदाय को अपमानित करता है। विरोध इतना तेज हुआ कि नेटफ्लिक्स को फिल्म की लिस्टिंग हटानी पड़ी, वहीं मेकर्स और ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ शिकायतें भी दर्ज कराई गईं। मामला बढ़ने पर राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता भी खुलकर सामने आ गए।
मायावती ने उठाई आपत्ति, केंद्र से की बैन की मांग
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने इस फिल्म को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि फिल्मों में जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल समाज में तनाव पैदा करता है और यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
मायावती ने लिखा कि ‘पंडत’ जैसे शब्द को घूसखोर बताकर पूरे ब्राह्मण समाज का अपमान किया जा रहा है, जिससे समाज में भारी रोष है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि ऐसी जाति आधारित फिल्मों और वेब सीरीज पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही लखनऊ पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने को उन्होंने उचित कदम बताया।
2007 में भी फिल्म के खिलाफ ले चुकी हैं सख्त फैसला
यह पहली बार नहीं है जब मायावती ने किसी फिल्म के खिलाफ मोर्चा खोला हो। साल 2007 में, जब उत्तर प्रदेश में बीएसपी की सरकार थी और मायावती मुख्यमंत्री थीं, तब माधुरी दीक्षित की फिल्म ‘आजा नचले’ को यूपी में बैन कर दिया गया था। फिल्म के एक गाने में ‘मोची’ और ‘सुनार’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को जाति विशेष का अपमान माना गया था। इसके बाद दलित संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए और मामला राजनीतिक रूप ले बैठा।
किताब में दर्ज है पूरा वाकया
पत्रकार अजोय बोस की किताब ‘बहनजी: ए पॉलिटिकल बायोग्राफी ऑफ मायावती’ में इस विवाद का विस्तार से जिक्र है। किताब के मुताबिक, फिल्म रिलीज के बाद दलित नेता उदित राज ने दिल्ली में थिएटर के बाहर धरना दिया। इसके बाद मायावती ने न सिर्फ यूपी में फिल्म बैन करवाई, बल्कि प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर देशभर में बैन की मांग की।
मायावती के विरोध के महज 12 घंटे के भीतर फिल्म के निर्माता यश चोपड़ा ने माफी मांगी और गाने से आपत्तिजनक शब्द हटाने का आश्वासन दिया।
मनोज बाजपेयी ने दी सफाई
‘घूसखोर पंडत’ में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं। विवाद बढ़ने पर उन्होंने भी सोशल मीडिया पर सफाई दी। मनोज ने कहा कि फिल्म का उद्देश्य किसी समुदाय को ठेस पहुंचाना नहीं था, बल्कि एक त्रुटिपूर्ण व्यक्ति की आत्म-खोज की कहानी दिखाना था। उन्होंने यह भी बताया कि जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मेकर्स ने प्रचार सामग्री हटाने का फैसला लिया है।





