अभिनेता राजकुमार राव ने जांलधर कोर्ट में सरेंडर किया, धार्मिक भावनाएं आहत करने का है आरोप

साल 2017 में 'बहन होगी तेरी' फिल्म में राजकुमार राव पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगा था। इस मामले में उन्होंने जालंधर कोर्ट में सरेंडर किया है।

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Rajkumar Rao
Rajkumar Rao

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। साल 2017 में राजकुमार राव की एक फिल्म आई थी जिसका नाम था बहन होगी तेरी। इस फिल्म में उनपर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगा था। अब उन्होंने इस मामले में जालंधर कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। हालांकि उन्हें राहत मिल गई है।

दरअसल, यह मामला वर्ष 2017 में रिलीज हुई उनकी फिल्म “बहन होगी तेरी” के प्रचार के दौरान सामने आए एक विवादास्पद पोस्टर से जुड़ा है। पोस्टर में राजकुमार राव भगवान शिव के रूप में मोटरसाइकिल पर बैठे नजर आए थे, जिसे लेकर धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाया गया था। इसी को आधार बनाकर उनके खिलाफ धारा 295A (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की मंशा), धारा 120B (आपराधिक साजिश), और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत FIR दर्ज की गई थी।

अभिनेता की याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जालंधर पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे शपथपत्र के माध्यम से जांच की स्थिति रिपोर्ट अदालत में पेश करें। याचिका में राजकुमार राव ने एफआईआर को रद्द करने की मांग की है। राजकुमार राव की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 295ए के तहत कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है, क्योंकि इस धारा के तहत अपराध सिद्ध करने के लिए आवश्यक है कि कृत्य “जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण मंशा” से किया गया हो। इसलिए, इस आधार पर दर्ज एफआईआर कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।

‘मैं सिर्फ किरदार निभा रहा था”

राजकुमार राव ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि उन्होंने महज एक फिल्मी किरदार निभाया था, जिसमें उनका पात्र एक जागरण मंडली में भगवान शिव की भूमिका अदा करता है। याचिका में दावा किया गया है कि यह पूरी तरह से एक कलात्मक प्रस्तुति थी, न कि धार्मिक भावनाएं आहत करने की कोई साजिश।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से स्वीकृति प्राप्त है, जो यह दर्शाता है कि फिल्म की सामग्री कानून के अनुसार आपत्तिजनक नहीं मानी गई। साथ ही, अभिनेता ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(A) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला भी दिया। 

इस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एन.एस. शेखावत ने जालंधर पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वे शपथपत्र के माध्यम से केस की स्टेटस रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले कोर्ट में दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई अब 8 अगस्त 2025 को होगी।

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