नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । अभिनेता अभिनव शुक्ला ने ग्रेटर नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की डूबने से हुई मौत पर गहरा दुख और रोष व्यक्त किया। उन्होंने नागरिकों की लापरवाही और बचाव में देरी को “घिनौना और शर्मनाक” बताते हुए कड़ी आलोचना की। शुक्ला ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि मौके पर मौजूद अधिकारी उस युवा की जान बचाने में असफल रहे। उन्होंने सीधे तौर पर NDRF और फायर डिपार्टमेंट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा “समझ नहीं आता कि आपके डिपार्टमेंट वहां क्यों मौजूद हैं, जब मदद नहीं कर रहे।
अभिनव शुक्ला ने की अधिकारियों की कड़ी आलोचना
सोमवार को अभिनेता अभिनव शुक्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा किया और नोएडा के टेक इंजीनियर युवराज मेहता की मौत पर अधिकारियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस मामले में जवाबदेही तय करने और कार्रवाई की मांग की।
कोई पेशेवर बचावकर्मी पानी में उतरकर मदद नहीं कर पाया।
वीडियो में शुक्ला ने कहा कि युवराज की कार एक निर्माणाधीन स्थल की दीवार से टकराकर पानी से भरे गड्ढे में गिर गई थी। हादसे के तुरंत बाद उन्होंने फायर डिपार्टमेंट, पुलिस और NDRF को सूचित किया। हालांकि, क्रेन और रस्सियों के साथ मौके पर मौजूद होने के बावजूद कोई पेशेवर बचावकर्मी पानी में उतरकर मदद नहीं कर पाया।
ये डिपार्टमेंट बुनियादी काम भी नहीं कर सकते
अभिनेता ने लिखा कि यह बेहद शर्मनाक है कि जिनका काम लोगों की जान बचाना है, वे केवल दर्शक बने रहे। उन्होंने साहसिक प्रयास के लिए फ्लिपकार्ट डिलीवरी कर्मी की सराहना की, जिसने खुद को रस्सी से बांधकर पानी में उतर कर युवराज तक पहुंचने की कोशिश की। बावजूद इसके, बचाव प्रयास असफल रहा। शुक्ला ने सवाल उठाया कि अगर ये डिपार्टमेंट बुनियादी काम भी नहीं कर सकते, तो फिर उनका अस्तित्व क्यों है।
NDRF और फायर डिपार्टमेंट की जवाबदेही पर सवाल
अभिनव शुक्ला ने युवराज मेहता की मौत के बाद अधिकारियों की भूमिका पर तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल कर्मचारियों को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। शुक्ला ने सवाल उठाया कि टैक्स देने वालों का पैसा ऐसे विभागों में क्यों लगाया जा रहा है, जो बुनियादी बचाव अभियान भी चलाने में नाकाम रहते हैं।
आखिरकार उनका मकसद क्या है?
शुक्ला ने इसे “शर्मनाक और घिनौना” बताया और कहा कि अधिकारियों को अपनी भर्ती और प्रशिक्षण प्रक्रियाओं का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए। उनका मानना है कि जिन्हें जान बचाने का काम सौंपा गया है, उनमें साहस और दक्षता होनी चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, अगर ये विभाग संकट के समय अपना मकसद पूरा नहीं कर सकते, तो उनके अस्तित्व पर ही सवाल उठना चाहिए। आखिरकार उनका मकसद क्या है?”
पुलिस और रेस्क्यू टीम मौजूद होने के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका ।
गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में शनिवार तड़के एक खाली प्लॉट पर गहरे पानी से भरे गड्ढे में कार गिरने से 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई। युवराज अपने गुरुग्राम स्थित ऑफिस से घर लौट रहे थे,। कार एक तेज 90-डिग्री मोड़ पर नीची बाउंड्री से टकराई और गड्ढे में गिर गई। पीड़ित ने लगभग दो घंटे तक मदद के लिए पुकारा, लेकिन पुलिस और रेस्क्यू टीम मौजूद होने के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका ।
नोएडा अथॉरिटी के CEO लोकेश एम को पद से हटा दिया।
इस हादसे के बाद यूपी सरकार ने नोएडा अथॉरिटी के CEO लोकेश एम को पद से हटा दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरठ जोन के ADG भानु भास्कर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है, जो पांच दिन में रिपोर्ट सौंपेगी। पुलिस ने दो रियल एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है, जिसमें दुर्घटना स्थल पर सुरक्षा बैरिकेड्स और रिफ्लेक्टर न लगने की लापरवाही सामने आयी है।





