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दंंतेवाड़ा : इंद्रावती नदी के मुचनार घाट में मगरमच्छ के 20 बच्चे मिले

एक मादा मगरमच्छ लगभग 25 से 30 अंडे देती है, बरसात के पहले अंडे से निकलते हैं बच्चे दंंतेवाड़ा, 30 जून (हि.स.)। जिले के इंद्रावती नदी के मुचनार घाट के किनारे रेत पर मगरमच्छ के 20 बच्चे मिलने की सूचना पर वन विभाग के कर्मचारियों ने इंद्रावती नदी में छोड़ दिया है। ऐसा पहली बार है कि इतनी बड़ी संख्या में नदी के आसपास मगरमच्छ के बच्चों को देखा गया है। गर्मियों के समय जब इंद्रावती नदी का पानी कम हो जाता है, तब अक्सर ही यहां पर मगरमच्छों को धूप सेंकते हुए देखा जा सकता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कई बार ऐसा देखा गया है कि ग्रामीण इन मगरमच्छों का शिकार करते हैं और इनकी चमड़ी से वाद्य यंत्र बनाते हैं। इस कारण इन मगरमच्छों को संरक्षित करने के लिए रिजर्व फॉरेस्ट की तरफ से विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। मगरमच्छ संरक्षण के लिए पिछले दो दशक से वन विभाग कार्य कर रही है। इसके लिए सरकार ने दो करोड़ का बजट भी जारी किया था, इस बजट से इंद्रावती नदी के एक एकड़ क्षेत्र में मगरमच्छ संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। वन विभाग के एसडीओ सोनवानी के अनुसार मगरमच्छ नर मादा का प्रजनन का समय नवंबर-दिसंबर के महिने में होता है, अप्रैल-मई के आसपास ये अंडे देते हैं, एक मादा मगरमच्छ लगभग 25 से 30 अंडे देती है, बरसात के पहले अंडे से बच्चे निकलते हैं। उन्होंने बताया कि इनके संरक्षण-संवर्धन के लिए सरकार के पास प्रस्ताव भेजा गया है। सरकार ने वन्य प्राणी क्रोकोडायल पार्क बनाने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। उन्होने बताया कि दंतेवाड़ा के संरक्षित वन के इलाके से होते हुए इंद्रावती नदी गुजरती है। इसके आसपास के क्षेत्र में अक्सर मगरमच्छ और उसके बच्चे पाए जाते हैं। लेकिन जितनी बड़ी तदाद में मुचनार कौशलनार घाट के किनारे मगरमच्छ के बच्चे पाए गए हैं, वह अपने आप में ही अच्छी बात है। हिन्दुस्थान समाचार/राकेश पांडे

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