the-sin-of-39killing39-nirah-dynasty-in-udaipur-is-not-worth-atonement---vhp
the-sin-of-39killing39-nirah-dynasty-in-udaipur-is-not-worth-atonement---vhp

उदयपुर में निरीह गोवंश की ‘हत्या’ का पाप प्रायश्चित लायक नहीं - विहिप

उदयपुर, 24 मई (हि.स.)। उदयपुर नगर निगम द्वारा बड़ी संख्या में पकड़े गए गोवंश को नगरीय सीमा के बाहर केवड़ा वन क्षेत्र में छोड़ दिए जाने के बाद गोवंश की मौतों को लेकर मीडिया में मामला उजागर होने के बाद हिन्दू संगठनों सहित कई संगठनों ने सवाल उठाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उल्लेखनीय है कि उदयपुर नगर निगम ने पिछले कुछ समय में सड़कों पर घूमते गोवंश को पकड़ कर काइन हाउस में रखा था। उनके मालिकों द्वारा उन्हें नहीं ले जाने से कुछ गायें एक साल से काइन हाउस में थीं। करीब 250 गोवंश को नगर निगम ने चरनोट में छुड़वाने के नाम पर उदयपुर-सलूम्बर मार्ग पर स्थित केवड़ा की नाल वन क्षेत्र में छुड़वा दिया। इस वन क्षेत्र में कई गोवंश भूख-प्यास से मर गए तो कई को वहां मौजूद पैंथर व अन्य वन्यजीवों ने शिकार बना लिया। स्थानीय ग्रामीणों ने भी गोवंश को वन क्षेत्र में छोड़े जाने पर आपत्ति की है। वे इन मारे गए गोवंश की सड़ांध से परेशान हैं। इस मामले में नगर निगम आयुक्त हिम्मत सिंह बारहठ ने मीडिया को यह बयान दिया था कि काइन हाउस में गायों को 15 दिन से ज्यादा रखने का प्रावधान नहीं है। गायों को लेने कोई नहीं आता, नीलामी में भी नहीं आता और गौशाला वालों से सम्पर्क किया तो वहां से भी कोई नहीं आया। गायों को चरागाह क्षेत्र में ही छोड़ा गया, यदि गायें वहां मर रही हैं तो अब वहां नहीं छोड़ा जाएगा। मामले ने रविवार को ही तूल पकड़ लिया था और हिन्दू संगठनों सहित अन्य संगठनों ने भी सोमवार को ज्ञापन देने का ऐलान करते हुए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग शुरू कर दी थी। उदयपुर शहर के सोशल मीडिया समूहों में भी गायों को वन्यजीवों का निवाला बनाने के लिए छोड़ दिए जाने को लेकर भत्र्सना की गई। लोगों ने यह भी कहा कि श्रीनाथजी के सेवकों की नगरी में महाराणाओं के समय भी गोचरी के लिए भूमि छोड़ी जाती थी और कुछ साल पहले तक मौजूद भी थी। गायों के चरने की जमीन को धीरे-धीरे कागजों में आबादी में ले लिया गया और गौमाता का आज यह हश्र देखने को मिला है। सोमवार को विश्व हिन्दू परिषद गोरक्षा विभाग ने जिला कलेक्टर के मार्फत मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर नगर निगम के अधिकारियों द्वारा किए गए ऐसे निर्णय पर रोष जाहिर किया और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। यह पाप प्रायश्चित लायक भी नहीं है। अधिकारी का बयान ‘अब नहीं छोड़ेंगे’ उनकी बेपरवाही को दर्शाता है, अधिकारी को इसका कोई मलाल ही नहीं है। हिन्दू संगठनों ने चेतावनी दी है कि 5 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन देने वालों में विहिप, बजरंग दल, बजरंग सेना, गोशाला, आदि संगठनों से जुड़े सम्पतलाल माहेश्वरी, कैलाश राजपुरोहित, कमलेन्द्र सिंह पंवार, नरेश शर्मा, गजेन्द्र औदिच्य, रमेश चंद्र चंदेल, कपिल सोनी, श्याम चंदेरिया, बद्रीसिंह राजपुरोहित, बसंत चैबीसा, अशोक कुमार प्रजापत, ललित लोहार, सुखलाल लोहार, पंकज भण्डारी आदि शामिल थे। दूसरी ओर, जनता सेना ने 250 गायों की मौत के मामले में केवड़ा वन क्षेत्र से संबंधित जावरमाइंस थाने में मामला दर्ज करवाया है। जनता सेना सुप्रीमो रणधीर सिंह भीण्डर के निर्देश पर युवा जनता सेना जिलाध्यक्ष पंकज सुखवाल ने नगर निगम गौशाला कर्मचारियों और ठेकेदार फर्म पर परिवाद दर्ज करवाया। उपाध्यक्ष विजय जोशी, गणपत सिंह राठौड़ व जिला मंत्री योगेश गुर्जर ने बताया कि सामने आना चाहिए कि गौमाता को पैंथर का निवाला बनाने में किसका षड़यंत्र था। गौरतलब है कि दो माह पूर्व भी नगर निगम आयुक्त के ऐसे ही आदेश का विरोध हुआ था जिसमें गायों को शहर निकासी का आदेश दे दिया गया था। बारहठ ने स्मार्ट सिटी के नियमों का हवाला देते हुए कहा था कि दो गायों को रखने के लिए 1500 वर्ग फीट का भूखण्ड जरूरी है। तब भी सवाल उठे थे कि एक-एक-दो-दो गायों को पालकर आजीविका चलाने वाले गरीब परिवारों के पास ऐसे भूखण्ड होते तो वे गौपालन क्यों करते, कोई और काम कर रहे होते। हिन्दुस्थान समाचार/सुनीता कौशल / ईश्वर

Related Stories

No stories found.