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बाल अधिकारों की रक्षा करना सभी का है दायित्व : अधीक्षक

-माता -पिता के अपराध की बच्चों को नहीं दी जा सकती है सजा - जेल प्रशासन ने महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों को कराया शिशु पार्क का परिभ्रमण छपरा, 15 मार्च (हि.स.)।मंडल कारा अधीक्षक मनोज कुमार सिन्हा ने कहा है कि बाल अधिकारों की रक्षा करना हम सभी का दायित्व है।उन्होंने कहा कि माता- पिता के अपराध की सजा बच्चों को नहीं दी जा सकती है। विश्व स्तर पर बाल अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार के द्वारा किए गए समझौता का पालन सभी स्तर पर हो रहा है, जिसमें जेल में बंद महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों के अधिकारों की रक्षा भी शामिल है।उन्होंने कहा कि वैसे तो, पहले से मंडल कारा में रह रही महिला बंदियों के बच्चों को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन जेल से बाहर की दुनिया से वह वंचित थे, जिसे पूरा करने के लिए जेल प्रशासन ने अहम निर्णय लिया है और इस निर्णय के तहत महिला बंदियों के बच्चों को शहर के शिशु पार्क में परिभ्रमण कराया गया। उन्होंने बताया कि जेल कर्मियों के देख-रेख में महिला पुलिस कर्मियों के साथ बच्चों को पहली बार शिशु पार्क का परिभ्रमण कराया गया। परिभ्रमण के लिए भेजे गए सभी आठ बच्चों की उम्र चार से पांच वर्ष है। उन्होंने कहा कि जेल में महिला बंदियों के साथ छह वर्ष तक के बच्चों को रखे जाने का प्रावधान है। वर्तमान समय में आठ ऐसे बच्चे हैं, जो किसी अपराध के गुनाहगार नहीं है, लेकिन उनकी माताएं जेल में है, जिसके कारण वह जेल में रह रहे हैं उन्होंने कहा कि इन बच्चों के लिए जेल के बाहर परिभ्रमण कराने की शुरुआत की गई है और नियमित रूप से अलग-अलग स्थानों पर कुछ समय के लिए परिभ्रमण के लिए भेजा जायेगा। मंडल कारा अधीक्षक ने बताया कि जेल उपाधीक्षक अजय कुमार के नेतृत्व में बच्चों को भेजा गया था, जिसमें आर्यन कुमार, आयुष कुमार, सूरज कुमार, अमृता कुमारी, पीयूष कुमार, प्रिया कुमारी, आकाश कुमार तथा आर्यन कुमार शामिल है। शिशु पार्क में जाकर बच्चों ने खूब मस्ती की। झूला झूले और अन्य बच्चों के साथ खेल-कूद किया। वापस लौटने पर काफी खुश नजर आए। हिन्दुस्थान समाचार / गुड्डू

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