नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। नागरिक विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने फ्लाइट और एयरपोर्ट पर हंगामा करने वालों के खिलाफ सख्त नियमों का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। नए प्रस्तावित नियमों के तहत क्रू से दुर्व्यवहार, नशे में उत्पात या किसी भी तरह की अनुशासनहीनता करने पर यात्रियों को भारी जुर्माना और कड़ी कार्रवाई झेलनी पड़ सकती है। फिलहाल DGCA ने एयरलाइंस और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं, जिनके आधार पर नियमों को अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा-यानि अब उड़ान के दौरान ‘नो-नॉनसेंस’ पॉलिसी की तैयारी पूरी है!
एयरपोर्ट पर हंगामा अब बिल्कुल नहीं चलेगा
नागरिक विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने साफ कर दिया है कि विमान और एयरपोर्ट कोई प्रदर्शन स्थल नहीं हैं। यात्रियों की सुरक्षा और उड़ान की व्यवस्था में जरा-सी भी बाधा डालने वाले व्यवहार पर अब सख्त कार्रवाई तय मानी जाएगी। ड्राफ्ट नियमों में “जीरो टॉलरेंस” यानी बिल्कुल भी ढील न देने की नीति अपनाने की बात कही गई है-मतलब हंगामा, दुर्व्यवहार या अव्यवस्था फैलाने की कोशिश अब सीधे मुश्किलें खड़ी कर सकती है।
इन हरकतों पर होगी सीधी कार्रवाई
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक अब फ्लाइट या एयरपोर्ट पर शराब या नशे में हंगामा करना, विमान के अंदर धूम्रपान करना, पायलट या केबिन क्रू के निर्देशों की अनदेखी करना, गाली-गलौज या मारपीट करना, इमरजेंसी गेट से छेड़छाड़ करना और फ्लाइट के भीतर नारेबाजी या विरोध प्रदर्शन करना गंभीर अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में यात्री को तुरंत फ्लाइट से उतारा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर पुलिस कार्रवाई भी की जा सकती है-यानि आसमान में अनुशासन से खिलवाड़ अब सीधे कानूनी पचड़े में डाल सकता है।
चार स्तरीय अपराध की सज़ा भी उसी हिसाब से
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने अपने ड्राफ्ट में अनुशासनहीन व्यवहार को चार अलग-अलग स्तरों में बांटने का प्रस्ताव रखा है। हल्की बदतमीज़ी से लेकर मारपीट, जानलेवा हिंसा और यहां तक कि कॉकपिट में घुसने की कोशिश जैसी गंभीर हरकतों को अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया है। अब यात्री की हरकत की गंभीरता के आधार पर ही सख्त कार्रवाई तय होगी-यानि जितनी बड़ी गलती, उतनी भारी सज़ा।
नो-फ्लाई लिस्ट में नाम तो उड़ान पर ब्रेक तय
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के ड्राफ्ट प्रस्ताव के मुताबिक गंभीर मामलों में यात्रियों को कुछ महीनों से लेकर कई साल तक उड़ान भरने से बैन किया जा सकता है। ऐसे लोगों का नाम “नो-फ्लाई लिस्ट” में डाला जाएगा, ताकि वे दूसरी एयरलाइन से टिकट लेकर भी नियमों से बच न सकें। कम से कम 30 दिन के बैन का भी प्रस्ताव है। हालांकि यह सूची सार्वजनिक नहीं होगी-इसे सिर्फ एयरलाइंस और संबंधित एजेंसियों के बीच साझा किया जाएगा। फिलहाल ये नियम ड्राफ्ट चरण में हैं और सभी पक्षों से सुझाव मिलने के बाद ही इन्हें अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा।





