DHFL Scam, Dheeraj Wadhawan: कौन हैं धीरज वधावन? ऐसे किया गया था देश का सबसे बड़ा बैंकिंग फ्रॉड

DHFL Scam: 17 बैंकों के कंसोर्टियम से 34 हजार करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी से संबंधित सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने डीएचएफएल के पूर्व डायरेक्टर धीरज वधावन को गिरफ्तार कर लिया है।
धीरज वधावन।
धीरज वधावन।रफ्तार।

नई दिल्ली, रफ्तार। दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) के पूर्व डायरेक्टर धीरज वधावन को 34 हजार करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। दिल्ली की एक स्पेशल कोर्ट के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई है। 13 मई (सोमवार) की शाम को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने वधावन को मुंबई में गिरफ्तार किया था। आज उन्हें स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

19 जुलाई 2022 को भी हुई थी गिरफ्तार

इससे पहले CBI ने वधावन को यस बैंक से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में हिरासत में लिया था। हालांकि, बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था। CBI के अफसरों ने बताया है कि DHFL मामले में कंपनी के पूर्व डायरेक्टर और उनके भाई कपिल को 19 जुलाई 2022 को भी गिरफ्तार किया गया था। 15 अक्टूबर 2022 को कपिल और धीरज समेत 75 संस्थाओं के विरुद्ध आरोप-पत्र दायर किए गए थे।

न्यायिक हिरासत में धीरज, कपिल वधावन और अजय नवांदर

अफसरों के अनुसार स्पेशल कोर्ट ने 3 दिसंबर 2022 को उन्हें जमानत दे दी थी। कोर्ट ने कहा था कि जांच अधूरी है। साथ ही आरोप-पत्र टुकड़ों में है। इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था। अभी धीरज वधावन और उनके भाई कपिल वधावन और अजय नवांदर न्यायिक हिरासत में हैं।

SEBI ने बैंक अकाउंट कुर्क करने का दिया था आदेश

फरवरी 2021 में सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने पूर्व DHFL प्रमोटरों, धीरज और कपिल वधावन के बैंक अकाउंट, शेयर और म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स को कुर्क करने का आदेश जारी किया था। SEBI ने यह आदेश डिस्कोजर नियमों का पालन न करने की वजह से उन पर लगाए जुर्माने को चुकाने में नाकामयाब रहने पर किया था।

बैंकों के एक कंसोर्टियम से फ्रॉड का मामला

यह मामला 17 बैंकों के एक कंसोर्टियम (संघ) के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है। इसे देश में सबसे बड़ा बैंकिंग लोन स्कैम बताया जा रहा है। साल 2010 से आरोपी फर्मों ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले 17 बैंकों के कंसोर्टियम से लोन लेना शुरू किया था। विभिन्न तारीखों में लोन को नॉन परफॉर्मिंग असेट्स (NPA) घोषित किया गया था। फंड के डायवर्जन, राउंड ट्रिपिंग और फंड की हेरा-फेरी के आरोपों पर रिपोर्ट्स आने के बाद जांच शुरू हुई थी। फिर 1 फरवरी 2019 को कर्जदाता बैंकों ने बैठक की थी।

ऑडिट में पकड़ाया था फंड डायवर्जन

1 अप्रैल 2015 से 31 दिसंबर 2018 तक KPMG को DHFL के स्पेशल रिव्यू ऑडिट करने को नियुक्त किया गया था। बैंकों ने 18 अक्टूबर 2019 को कपिल और धीरज वाधावन के विरुद्ध लुक आउट सर्कुलर जारी करने की मांग की थी, जिससे वो देश छोड़कर नहीं जा सके। ऑडिट में कपिल और धीरज द्वारा किए गए फंड डायवर्जन, फंड की राउंड ट्रिपिंग और अन्य अनियमितताएं सामने आई थीं।

CBI ने 2 साल पहले की थी छापेमारी

इस मामले में CBI ने 2 साल पहले मुंबई में 12 जगहों पर छापेमारी की थी। CBI ने DHFL, कपिल वाधवान, धीरज वाधवान, सुधाकर शेट्टी, दर्शन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, सिगटिया कंस्ट्रक्शन बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड, टाउनशिप डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, शिशिर रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड, सनब्लिंक रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, स्काईलार्क बिल्डकॉन प्रा. लिमिटेड और अन्य को आरोपी बनाया था।

कैसे किया गया था घोटाला?

CBI के अनुसार साल 2018 के अप्रैल और जून के बीच यस बैंक ने DHFL के शॉर्ट टर्म डिबेंचर में 3700 करोड़ रुपए निवेश किया था। इसके एवज में वधावन ने कथित तौर पर डीओआईटी अर्बन वेंचर्स को 600 करोड़ रुपए का लोन दिया था। CBI का कहना है कि यह लोन नहीं रिश्वत थी। इन वेंचर्स पर कपूर की पत्नी और बेटियों का पूरा कंट्रोल था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बताया कि DHFL ने लेन-देन को कवर करने को 40 करोड़ रुपए की संपत्तियों के बदले 600 करोड़ रुपए का लोन दिया था।

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