नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हम आए दिन शेयर बाजार में निवेश करने वालों से डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट के बारे में बहुत सुनते हैं लेकिन अधिकांश लोगों को इन दोनों खातों के बीच का अंतर नहीं मालूम होता है। आइए जानते हैं क्या हैं कि डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट और इनमें क्या-क्या अंतर होता है?
क्या होता है Demat Account?
Demat अकाउंट असल में एक डिजिटल लॉकर की तरह है। जिस तरह एक डिजिटल लॉक में आप अपने जरूरी डॉक्यूमेंट्स रख सकते हैं। उसी तरह जब आप शेयर मार्केट में कोई शेयर खरीदते हैं तो वो शेयर आपके डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है और वहां पर सुरक्षित रहता है। पहले के समय में शेयर सर्टिफिकेट दिए जाते थे, लेकिन फिजिकल सर्टिफिकेट का रखरखाव और उसका ट्रांसफर बहुत पेचीदा था। इसके साथ ही ट्रांसफर में समय भी कई दिन का लग जाता था। इसलिए शेयर सर्टिफिकेट डिजिटली बनाए गए, डीमैट अकाउंट में शेयर के अलावा अगर आप कोई सरकारी बॉन्ड खरीदते हैं तो वो भी सीधे वहां ट्रांसफर हो जाता है। पहले ट्रेडिंग डे के बाद कई-कई दिल लग जाते थे शेयर हाथ में आने में। डिजिटल प्रक्रिया के बाद ये प्रक्रिया आसान हुई और तीन से चार दिन के अंदर शेयर डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर किए जाने लगे। अब ये प्रक्रिया और तेज़ हो गई है और मार्च 2024 में T+0 सेटलमेंट इंट्रोड्यूस किया गया। यानी जिस दिन ट्रेड हो उसी दिन शेयर ट्रांसफर हो जाते हैं।
Trading Account क्या होता है?
डीमैट अकाउंट का इस्तेमाल शेयर मार्केट में खरीद-बिक्री के लिए नहीं किया जा सकता है। इसके लिए ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत पड़ती है। शेयर मार्केट में ट्रेडिंग के लिए आपके ट्रेडिंग अकाउंट, डीमैट अकाउंट और बैंक अकाउंट का लिंक होना जरूरी है। ट्रेडिंग अकाउंट से जब आप शेयर खरीदते हैं तो आपके बैंक अकाउंट से पैसा कटता है और फिर आपके डीमैट अकाउंट में आपके द्वारा खरीदा गया शेयर ट्रांसफर कर दिया जाता है।




