नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। 13 जनवरी को डॉलर के सामने रुपये फिर सरेंडर करता हुआ नजर आया। सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपये के रेट में 0.33 रुपये की गिरावट देखी गई है। 0.39 प्रतिशत गिरकर रुपये का भाव 86.53 तक आ गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि शेयर बाजार में विदेशी निवेश भारी मात्रा में हो रहा है जिसके चलते भारी बिकवाली की वजह से रुपये के रेट में गिरावट देखी जा रही है।
रुपये में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज
शनिवार को जब कारोबारी हफ्ता खत्म हुआ तो रुपये का रेट 86.04 पर बंद हुआ था। जबकि सोमवार को इसमें भारी गिरावट देखी गई जिसके चलते रुपया डॉलर के मुकाबले अपने ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। खबर लिखे जाने तक एक डॉलर की कीमत 86.53 रुपये है। एक्सपर्ट्स के अनुमान के मुताबिक भारत में शेयर बाजार में विदेशी इन्वेस्टर्स द्वारा भारी मात्रा में बिकवाली की जा रही है। यह रुपये के गिरावट का एक संभावित कारण हो सकता है। हालांकि विश्व के किसी न किसी हिस्से में दो देशों के बीच तनाव का माहौल है जिसके चलते जियो पॉलिटिकल टेंशन सामने आ रही है, इसे में रुपये के रेट में गिरावट का कारक माना जा रहा है।
अमेरिका में रहने वाले भारतीय छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित
अगर किसी देश की करेंसी गिरती है तो इसका सरकार पर तो दवाब पड़ता ही है बल्कि आम नागरिक भी प्रभावित होता है। रुपये की गिरावट के चलते आयात मंहगा हो जाता है जबकि निर्यात सस्ता हो जाता है। इसके अलावा अमेरिका में पढ़ने वाले छात्र भी इससे खासे प्रभावित होते हैं। जब भारत में रहने वाले छात्रों के अभिभावक अमेरिका या किसी दूसरे देश में डॉलर में रुपये भेजते हैं तो भारत के मुकाबले उसकी कीमत बेहद कम रहा जाती है। जैसै जैसे डॉलर मजबूत होगा वैसे वैसे रुपये की वैल्यू कम होती जाएगी। वह सभी क्षेत्र इससे प्रभावित होंगे जहां डॉलर में कारोबार किया जाता है।




