नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । मई में जब डॉलर के मुकाबले रुपये का स्तर 83 तक आया था, तो उम्मीद थी कि यह 80 के पार जाकर मजबूत होगा। लेकिन पिछले 7 महीनों में रुपये में लगातार गिरावट देखने को मिली है और बुधवार को पहली बार यह 90 के लेवल को पार कर गया। विशेषज्ञों के अनुसार, रुपए में गिरावट का मुख्य कारण लोकल स्तर पर डॉलर की बढ़ती मांग और विदेशी निवेशकों की मुनाफावसूली है।
अब सवाल उठता है कि क्या रुपया और गिर सकता है? जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपया 91 के स्तर तक जा सकता है। वहीं, फेड की ब्याज दर में कटौती और आरबीआई की मौद्रिक नीति के रुख को देखकर रुपये की चाल में बदलाव भी संभव है। इस समय रुपया डॉलर के मुकाबले में किस लेवल पर कारोबार कर रहा है, यह जानना निवेशकों के लिए अहम हो गया है।
रुपया पहली बार 90 के पार
बुधवार को रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 90 के स्तर को पार कर गया और शुरुआती कारोबार में 6 पैसे गिरकर 90.02 पर आ गया। इस गिरावट का कारण बैंकों द्वारा उच्च स्तर पर डॉलर की खरीद और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी को माना जा रहा है। हालांकि, कमजोर डॉलर इंडेक्स और ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में कमी ने इस भारी गिरावट को कुछ हद तक कम किया।
इंटरबैंक फॉरेन करेंसी मार्केट में रुपया 89.96 पर खुला और रिकॉर्ड निचले स्तर 90.15 तक लुढ़क गया। इसके बाद कुछ सुधार के साथ यह 90.02 पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से 6 पैसे कम था। मंगलवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 43 पैसे गिरकर 89.96 के लाइफटाइम लोअर पर बंद हुआ था। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे सट्टेबाजों की शॉर्ट-कवरिंग और डॉलर की लगातार मांग मुख्य कारण रहे।
रुपए में गिरावट के पीछे क्या हैं कारण?
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी हेड और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इंपोर्टर्स की मदद करना चाहते हैं, जिससे रुपये में कमजोरी बनी हुई है और डॉलर की मांग बढ़ रही है। भंसाली ने बताया कि नेशनलाइज्ड बैंक लगातार डॉलर खरीद रहे हैं। ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर बाजार बंद होने के बाद एक सौदा 90.0050 पर हुआ। इसके अलावा, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में रुकावट और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारी निकासी के कारण रुपये में गिरावट आई, भले ही डॉलर इंडेक्स कमजोर रहा।
भंसाली ने चेतावनी दी कि यदि आरबीआई का सपोर्ट 90 पर कम रहा, तो रुपये में गिरावट 91 तक जा सकती है। एमपीसी की बैठक बुधवार से शुरू हो रही है, और ब्याज दर पर फैसला 5 दिसंबर को घोषित होगा, जबकि फेडरल रिज़र्व अपनी पॉलिसी रेट 10 दिसंबर को घोषित करेगा। उनका कहना है कि आरबीआई द्वारा ब्याज दर में कटौती होने पर रुपये में और बिकवाली देखने को मिल सकती है।
डॉलर, तेल और शेयर बाजार
इस बीच, डॉलर सूचकांक (छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती मापने वाला) में 0.13% की गिरावट आई और यह 99.22 पर कारोबार कर रहा था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड तेल भी कमजोर रहा। आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड 0.03% की गिरावट के साथ 62.43 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। घरेलू शेयर बाजार में भी दबाव दिखा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 165.35 अंक गिरकर 84,972.92 पर और निफ्टी 77.85 अंक गिरकर 25,954.35 पर आ गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफ़आईआई) ने मंगलवार को 3,642.30 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, दिसंबर महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से कुल 4,335 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है।
7 महीने में 8% गिरा रुपया
पिछले 7 महीनों में रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 8% कमजोर हो चुका है। आंकड़ों के अनुसार, 2 मई 2025 को रुपया 83.76 के स्तर पर साल का उच्चतम स्तर था। लेकिन 3 दिसंबर 2025 को यह 90.15 के स्तर पर पहुँच गया, जो अब तक का लाइफटाइम लोअर माना जा रहा है। इस अवधि में डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 6.39 रुपये गिरा है, यानी रुपये की वैल्यू करीब 8 फीसदी तक घट चुकी है।





