नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। राइड-हेलिंग ऐप Rapido ने हाल ही में एक नया “ट्रैफिक चार्ज” सिस्टम शुरू किया है, जिससे यात्रियों के बीच नाराज़गी और बहस का माहौल बन गया है। अब अगर आपकी राइड ट्रैफिक में फंस जाती है और 10 मिनट से ज्यादा की देरी होती है, तो हर मिनट के लिए 0.50 रुपये अतिरिक्त चार्ज लगेगा। हालांकि, यह शुल्क अधिकतम 30 रुपये तक सीमित रहेगा।
यात्रियों का गुस्सा: “गलती हमारी नहीं, तो चार्ज क्यों?”
लोगों ने इस नियम को अन्यायपूर्ण और शोषणकारी बताया है। उनका कहना है कि ट्रैफिक जैसी चीज़ें उनके नियंत्रण में नहीं होती, इसलिए उसके लिए पैसे लेना भरोसे के साथ धोखा है। बेंगलुरु की रहने वाली पवित्रा राव ने एक अख़बार को बताया कि उन्होंने ड्राइवर को पहले ही 40 रुपये टिप दी थी, लेकिन फिर भी उन्हें ट्रैफिक की वजह से एक्स्ट्रा चार्ज देना पड़ा। उन्होंने कहा,”मेहनत का पैसा मिलना चाहिए, लेकिन जो हमारे कंट्रोल में नहीं है, उस पर चार्ज लेना जबरन वसूली जैसा है।
पहले ‘टिपिंग’, अब ‘ट्रैफिक चार्ज’ पर विवाद
कुछ समय पहले ही रैपिडो, ओला और उबर जैसे ऐप्स पर टिपिंग को अनिवार्य जैसा दिखाने को लेकर विवाद हुआ था। उस समय भी यात्रियों ने विरोध जताया था कि बुकिंग के समय टिप जोड़ने का दबाव डाला जा रहा है।
इस पर उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने CCPA को जांच के निर्देश दिए थे। अब ट्रैफिक चार्ज के कारण एक बार फिर इन प्लेटफॉर्म्स की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं।
ट्रैफिक से पैसा कमाना? भरोसा टूट रहा है
का कहना है कि ये कंपनियां अब उन परिस्थितियों से कमाई कर रही हैं, जो पूरी तरह से ग्राहक के नियंत्रण से बाहर हैं। इससे उनका इन ऐप्स पर से भरोसा उठता जा रहा है। एक यूजर ने कहा:”अगर ऐसा ट्रेंड चल निकला, तो हर सिग्नल पर एक नया बिल आएगा। क्या हर देरी का दोष ग्राहक पर ही जाएगा?”
सरकारी जांच जारी, रैपिडो अब तक चुप
CCPA इस पूरे मामले की समीक्षा कर रही है, लेकिन रैपिडो की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक सफाई या स्पष्टीकरण नहीं आया है। इस बीच, सोशल मीडिया पर #BoycottRapido जैसे हैशटैग भी ट्रेंड कर चुके हैं। यह मामला ग्राहक अधिकारों और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही से जुड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नियमों पर सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए, ताकि यात्रियों का भरोसा बना रहे और ट्रांसपेरेंसी आए।





