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Monday, March 2, 2026
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Rapido को 50 रुपये का भ्रामक विज्ञापन पड़ा महंगा, CCPA ने ठोका 10 लाख का जुर्माना, जानें क्‍या है पूरा मामला

बाइक टैक्सी सेवा प्रदाता रैपिडो को अपने भ्रामक प्रचार के चलते सेंट्रल कंज्‍यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी से बड़ा झटका लगा है। अथॉरिटी ने कंपनी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क। बाइक टैक्सी सेवा देने वाली कंपनी रैपिडो को अपना भ्रामक प्रचार भारी पड़ गया है। कंपनी द्वारा चलाया जा रहा प्रचार संदेश “पांच मिनट में ऑटो नहीं मिला तो 50 रुपये” सेंट्रल कंज्‍यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) को गुमराह करने वाला लगा, जिसके बाद रैपिडो पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। उपभोक्ता मंत्रालय ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि CCPA ने रैपिडो को यह भी आदेश दिया है कि वह उन सभी उपभोक्ताओं को 50 रुपये की राशि लौटाए, जिन्हें यह ऑफर दिखाया गया था लेकिन वादा पूरा नहीं किया गया।

50 रुपये नहीं, केवल रैपिडो कॉइन  

जांच में सामने आया कि रैपिडो का यह दावा वास्तव में नकद 50 रुपये का नहीं था, बल्कि “50 रुपये तक के रैपिडो कॉइन” का था, जिनका उपयोग केवल अगली बाइक राइड में किया जा सकता था। इतना ही नहीं, इन कॉइन्स की वैधता सिर्फ 7 दिन थी। यानी उपभोक्ताओं को मजबूर किया गया कि वे कम समय के भीतर दोबारा रैपिडो की सेवा लें।

रैपिडो के खिलाफ कई शिकायतें 

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के आंकड़ों के अनुसार, जून 2024 से जुलाई 2025 के बीच रैपिडो के खिलाफ शिकायतों की संख्या 1,224 तक पहुंच गई, जबकि इससे पहले के 14 महीनों में यह संख्या केवल 575 थी। CCPA की जांच में यह भी पाया गया कि ऑफर से जुड़ी शर्तें और डिस्क्लेमर इतने छोटे अक्षरों में छापे गए थे कि आम ग्राहक के लिए उन्हें पढ़ पाना मुश्किल था। इससे स्पष्ट है कि कंपनी ने जानबूझकर नियम और शर्तें छिपाने की कोशिश की, ताकि उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा सके। 

भ्रामक विज्ञापन तुरंत बंद करने का आदेश

मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि इस तरह के प्रतिबंधों ने ऑफर की अहमियत को कम कर दिया और उपभोक्ताओं को गुमराह किया। इसी आधार पर सीसीपीए ने रैपिडो को भ्रामक विज्ञापन तुरंत बंद करने का निर्देश दिया है। इस मामले से आम उपभोक्ताओं के लिए यह सीख मिलती है कि किसी भी ऑफर को स्वीकार करने से पहले उसकी शर्तें और डिस्क्लेमर ध्यान से पढ़ें। साथ ही, “कैश” और “वाउचर” में फर्क समझना जरूरी है, क्योंकि कई बार कंपनियां नकद के बजाय कूपन, पॉइंट्स या कॉइन देती हैं, जिनकी वैधता सीमित होती है।

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