नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) योजना के तहत निवेश करने वालों के लिए खबर किसी झटके से कम नहीं है। स्माल सेविंग स्कीम के तहत सरकार द्वारा मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए एक खास योजनाएं चलाई जाती है, ताकि उन्हें आगे आर्थिक समस्याओं का सामना नहीं करना पड़े।
इसी तरह पब्लिक प्रोविडेंड फंड (PPF) भी इसी योजना में से है। यह एक लॉन्ग टर्म योजना है, जो निवेशकों को मोटा पैसा बनाकर देता है। इस योजना का मैच्योरिटी पीरियड 15 साल तक है, हालांकि इसे 5-5 साल करके दो बार और बढ़ाया जा सकता है।
अभी PPF स्कीम के तहत निवेशकों को 7.1% सालाना चक्रवृद्धि ब्याज मिलता है। PPF अकाउंट में डिपॉजिट, उसपर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी अमाउंट तीनों ही टैक्स फ्री हैं। लेकिन इस बीच, बड़ी जानकारी सामने आई है कि, अब PPF का ब्याज कम हो सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा इस वर्ष रेपो रेट में 100 बेसिस पॉइंट की कटौती किए जाने के बाद, अटकलें लगाई जा रही हैं कि आगामी जुलाई संशोधन में सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) की ब्याज दरें 6.5% से नीचे आ सकती है।
क्यों PPF रेट में हो सकती है कटौती?
इन रेट में कटौती की के पीछे गिरते बॉन्ड यील्ड और नीतिगत बदलाव इसके मुख्य कारण है। इन कारण इसके रेट में कटौती की आशंका लगाई जा रही है। श्यामला गोपीनाथ समिति के फार्मूले के अनुसार, PPF रिटर्न औसत 10 साल की G-सेक उपज से 25 आधार अंक अधिक होना चाहिए। अब जब यह 6.325% पर है, तो फार्मूला उचित PPF रेट को लगभग 6.57% पर रखता है, जो संभावित रूप से वर्तमान दर से 52.5 बेसिस पॉइंट की कटौती के ट्रिगर का अनुमान लगा रहा है।
रेपो रेट में कटौती से घट सकता है ब्याज
कुछ रिपोट्स के मुताबिक, स्क्रिपबॉक्स के संस्थापक और सीईओ अतुल सिंघल ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 2025 में रेपो दर में कुल 100 आधार अंकों की कटौती के साथ, अब ध्यान लघु बचत योजना ब्याज दरों के आगामी तिमाही संशोधन पर है। एक्सपर्ट ने इसके ब्याज में कमी से पहले पैसे निकालने की सलाह दी है।
एक्सपर्ट्स का क्या है अनुमान?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, 7.10% की मौजूदा दर अभी भी गोपीनाथ फॉर्मूले के अनुसार 6.55% से 7.3% की स्वीकार्य सीमा के तहत है। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा बनाए रखने और खुदरा निवेशकों को समर्थन देने के लिए, सरकार PPF रेट्स को फिलहाल स्थिर रखते हुए किसी भी रेट में कटौती में देरी कर सकती है।
और एक्सपर्ट ने इस बात पर सहमति जताई कि छोटी बचत योजनाओं में ब्याज दरें घटने की संभावना है। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास को बढ़ावा देने पर अपने फोकस को देखते हुए, आरबीआई ने 6 जून को रेपो दर में 0.5% की कमी की। अब छोटी बचत योजनाओं के लिए ब्याज दरें कम होने की संभावना है।
गौरतलब है कि, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) की ब्याज दरों में पिछले कुछ दशकों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। अभी 7.1% प्रति वर्ष रेट है, यह आंकड़ा अप्रैल 2020 से नहीं बदला है। ब्याज का कैलकुलेशन मासिक रूप से किया जाता है और सालाना के आधार जमा की जाती है।





