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दिल्ली में 6732 मेगावाट तक पहुंच गई पावर डिमांड, स्कूलों में ग्रीष्मावकाश की मांग

नई दिल्ली, 16 मई (आईएएनएस)। दिल्ली में 15 मई की रात 11 बजकर 36 मिनट पर बिजली की कुल डिमांड 6732 मेगावाट तक पहुंच गई। दिल्ली में बिजली की यह पीक डिमांड थी। बिजली कंपनियों के मुताबिक यह इस वर्ष अभी तक मई महीने की सबसे अधिक पावर डिमांड है। गौरतलब है कि दिल्ली में बीते कई दिनों से भयंकर गर्मी पढ़ रही है। वहीं तेज बढ़ती गर्मी के बीच विभिन्न अभिभावक संगठनों ने दिल्ली एनसीआर के सभी स्कूलों को ग्रीष्मावकाश के लिए बंद करने की मांग की है। हालांकि इस मांग से पहले ही दिल्ली के कई स्कूलों ने अवकाश घोषित कर दिया है तो कुछ स्कूल ऑनलाइन मोड में आ गए हैं। दरअसल दिल्ली में गर्मी के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। मई माह से पहले अप्रैल में भी दिल्ली में रिकॉर्ड गर्मी दर्ज की गई। मई माह के दौरान रविवार रात बिजली की डिमांड 6732 मेगावाट तक पहुंची वहीं 11 मई को पीक पावर डिंमाड 6572 मेगावाट थी। हालांकि यह अब तक की सबसे अधिक पावर डिमांड नहीं है। दिल्ली में साल 2019 में अब पीक पॉवर डिमांड 7409 मेगावाट दर्ज की गई थी। गौरतलब है कि रविवार को दिल्ली के कई इलाकों में पारा 49 डिग्री के पार पहुंच गया था। नजफगढ़ में ये 49.1 डिग्री और मुंगेशपुर में 49.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। हालांकि रविवार की तेज गर्मी के बाद सोमवार को दिल्ली में गर्मी से कुछ राहत मिली। मौसम विभाग के मुताबिक अभी आने वाले दिनों में गर्मी बनी रहेगी इसके साथ साथ लू भी चलेगी। मौसम विभाग की ही चेतावनी को देखते हुए अब अभिभावकों ने दिल्ली सरकार से अपील की है कि दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों में ग्रीष्म अवकाश घोषित कर दिए जाएं। बढ़ती लू और गर्मी के कारण स्कूलों एवं कई परीक्षा केंद्रों पर छात्र हीट स्ट्रोक का शिकार हो रहे हैं। इसको देखते हुए शिक्षा मंत्रालय भी लू के दुष्प्रभावों से छात्रों को बचाने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक तेज गर्मी से बचने के लिए स्कूल का समय जल्दी प्रात 7.00 बजे से शुरू किया जा सकता है और दोपहर से पहले स्कूल खत्म हो सकता है। प्रतिदिन स्कूल के घंटों की संख्या कम की जा सकती है। खेल व अन्य बाहरी गतिविधियां जो छात्रों को सीधे सूर्य के प्रकाश के संपर्क में लाती हैं, उन्हें सुबह के समय उचित रूप से समायोजित किया जा सकता है। तेज गर्मी के बीच बोर्ड परीक्षाएं भी ली जा रही हैं। परीक्षा केंद्रों को लेकर भी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने विशेष निर्देश जारी किए हैं। इनमें कहा गया है कि बच्चों को परीक्षा हॉल में अपनी पारदर्शी पानी की बोतल लाने की अनुमति दी जाए। परीक्षा केंद्रों को पेयजल सुनिश्चित करना चाहिए जो केंद्रों पर आसानी से उपलब्ध हो। परीक्षा केंद्रों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि परीक्षा हॉल में उनकी सीटों पर मांगे जाने पर उम्मीदवारों को तुरंत पानी की आपूर्ति की जाए। परीक्षा हॉल में पंखे लगाए जा सकते हैं। परीक्षा केंद्र पर प्रतीक्षा क्षेत्र पर पानी के साथ छाया हो। किसी भी आपात स्थिति के लिए परीक्षा केंद्रों को स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता और चिकित्सा केंद्रों से जोड़ा जाए। मंत्रालय ने सभी स्कूलों को दिशा निर्देश देते हुए कहा है कि सभा को कम समय में कवर क्षेत्र में या कक्षाओं में आयोजित किया जाना चाहिए। स्कूल खत्म होने के बाद डिस्पर्सल के दौरान भी इसी तरह का ध्यान रखा जा सकता है। --आईएएनएस जीसीबी/एएनएम

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