नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । पिछले दो वर्षों में देश के ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी में तेजी से कमी आई है। स्टेट बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी दर पहली बार 5 प्रतिशत से नीचे आ गई है। पहले यह 7.2 प्रतिशत था। अब यह अनुपात घटकर 4.86 प्रतिशत हो गया है। शहरी क्षेत्रों में भी ऐसी ही स्थिति है। जहां गरीबी दर 4.6 प्रतिशत से घटकर 4.09 प्रतिशत हो गयी है। स्टेट बैंक ने यह रिपोर्ट वस्तुओं और सेवाओं पर जनता के खर्च के आधार पर तैयार की है।
जैसे-जैसे भौतिक बुनियादी ढांचे में वृद्धि हो रही है। गांवों और शहरों के बीच का अंतर कम होता जा रहा है। इसलिए, दोनों स्थानों के बीच आय का अंतर भी कम हो रहा है। शहरों और गांवों के बीच अंतर कम करने का एक अन्य कारण प्रत्यक्ष प्रॉफिट ट्रांसफर जैसी सरकारी योजनाएं हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी गांव में प्रति व्यक्ति मासिक व्यय कई कारकों पर निर्भर करता है जैसे कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचता है या नहीं, क्या गांव में बुनियादी ढांचे का विकास हो रहा है, जिससे औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि हो। लोगों की जीवनशैली में भी सुधार होता है। किसानों की आय बढ़ाने या ग्रामीणों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए सरकार ने किस तरह के कदम उठाए हैं।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों का मासिक व्यय 1,632 रुपये तथा शहरी क्षेत्रों में 1,944 रुपये है। इससे पहले 2011-12 में गांवों और शहरों के लिए यह आंकड़ा क्रमशः 816 रुपये और 1,000 रुपये था। इसका मतलब है कि खपत बढ़ गई है। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में गरीबी दर अब 4 प्रतिशत से 4.5 प्रतिशत के बीच हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बुनियादी ढांचे में सुधार के कारण ग्रामीण क्षेत्र तेजी से समृद्ध हो रहे हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच आय का अंतर कम हो रहा है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच अंतर कम होने का एक अन्य कारण डायरेक्ट कैश ट्रांसफर के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना है।





