नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य उन लोगों को सशक्त बनाना है, जो अपने पारंपरिक हुनर जैसे लोहार, सुनार, बढ़ई, नाई, कुम्हार या अन्य हाथ के काम के जरिए आजीविका कमाते हैं। सरकार चाहती है कि ये कारीगर सिर्फ रोजगार तक सीमित न रहें, बल्कि अपने कौशल को व्यवसाय में बदलकर आय बढ़ा सकें।
पारंपरिक हुनर को आधुनिक पहचान
यह योजना खास तौर पर 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों के लिए बनाई गई है। इसके तहत लाभार्थियों को आधुनिक तकनीक से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि वे बदलते बाजार के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें। ट्रेनिंग के दौरान 500 रुपये प्रतिदिन का स्टाइपेंड भी दिया जाता है, जिससे प्रशिक्षण अवधि में आर्थिक दबाव न बढ़े। प्रशिक्षण पूरा होने पर विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और आईडी कार्ड दिया जाता है, जो उनकी पहचान और विश्वसनीयता को मजबूत करता है।
टूलकिट और स्किल अपग्रेडेशन का लाभ
सरकार की ओर से 15 हजार रुपये तक का टूलकिट प्रोत्साहन भी दिया जाता है, ताकि कारीगर अपने काम के लिए जरूरी आधुनिक उपकरण खरीद सकें। इसके अलावा स्किल अपग्रेडेशन कार्यक्रम के जरिए उन्हें नए डिजाइन, नई तकनीक और बाजार की मांग के बारे में जानकारी दी जाती है। इससे छोटे स्तर पर काम करने वाले कारीगर भी बड़े बाजार में अपनी जगह बना सकते हैं।
सिर्फ 5% ब्याज पर 3 लाख तक का लोन
योजना की सबसे बड़ी खासियत कम ब्याज दर पर ऋण सुविधा है। अगर कोई कारीगर पूंजी की कमी के कारण काम शुरू या विस्तार नहीं कर पा रहा है, तो उसे कुल 3 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है। पहले चरण में 1 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाता है। समय पर भुगतान और व्यवसाय की प्रगति के बाद दूसरे चरण में 2 लाख रुपये तक का अतिरिक्त लोन मिल सकता है। यह ऋण मात्र 5 फीसदी वार्षिक ब्याज दर पर उपलब्ध है, जो सामान्य बाजार दरों से काफी कम है।
कैसे करें आवेदन?
कारीगर ऑनलाइन आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर भी ऑफलाइन आवेदन किया जा सकता है। आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक खाता और संबंधित व्यवसाय से जुड़ी जानकारी आवश्यक होती है।
अर्थव्यवस्था में मजबूत योगदान दे सकेंगे
सरकार की इस पहल से उम्मीद है कि पारंपरिक हुनर को नई पहचान मिलेगी और कारीगर आत्मनिर्भर बनकर देश की अर्थव्यवस्था में मजबूत योगदान दे सकेंगे।


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