नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। 7 अप्रैल 2025, सोमवार को मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह नई दरें सोमवार की रात 12 बजे से लागू होंगी। इस फैसले ने आम जनता को हैरानी में डाल दिया है क्योंकि यह ऐसे समय में लिया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तीन साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी हैं।
62 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा कच्चा तेल
पिछले हफ्ते क्रूड ऑयल की कीमत घटकर 62 डॉलर प्रति बैरल रह गई। यह अगस्त 2021 के बाद की सबसे कम कीमत है। गिरावट की वजह है वैश्विक मंदी की आशंका और तेल की मांग में कमी। ब्रेंट क्रूड फिलहाल 63.23 डॉलर प्रति बैरल पर है और अमेरिकी Nymex क्रूड 10% गिरकर 62 डॉलर पर आ गया है।
लोगों के मन में उठे सवाल
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता हो रहा है, तब भारत में इसके दाम क्यों बढ़ रहे हैं? विपक्षी पार्टियों और आम जनता ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा, “क्या डायनामिक प्राइसिंग सिर्फ तब लागू होती है जब दाम बढ़ाने हों?” अब जनता उम्मीद कर रही थी कि पेट्रोल-डीजल सस्ते होंगे, लेकिन सरकार ने उल्टा कदम उठाया। कच्चे तेल की कीमत गिरने से इंडियन ऑयल, BPCL और HPCL जैसी कंपनियों को फायदा हो रहा है। इनकी ऑटो फ्यूल मार्केटिंग मार्जिन अब 13 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जबकि आम तौर पर यह 3.5 से 6.2 रुपये होती है। यानी कंपनियां अच्छा मुनाफा कमा रही हैं।
कुछ कंपनियों को हो सकता है नुकसान
हालांकि, ONGC और ऑयल इंडिया जैसी कंपनियों के लिए यह गिरावट नुकसानदायक हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर 1 डॉलर की गिरावट से उनकी प्रति शेयर आय में 1.5-2% की कमी आ सकती है। साथ ही, अगर कीमतें 70 डॉलर से नीचे बनी रहीं, तो अमेरिकी शेल ऑयल कंपनियों और सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल सरकार की ओर से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती को लेकर कोई संकेत नहीं मिला है। उल्टा, टैक्स बढ़ाकर कीमतें और बढ़ाई जा रही हैं। ऐसे में आम आदमी के लिए राहत की उम्मीद फिलहाल धुंधली ही नजर आ रही है।




