नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। ओला, उबर और रैपिडो जैसे ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म से जुड़े ड्राइवरों ने शनिवार को छह घंटे की देशव्यापी हड़ताल की घोषणा की है। ऑल इंडिया ब्रेकडाउन के तहत ड्राइवर ऐप से लॉग-आउट रहेंगे, जिससे कई शहरों में कैब और बाइक टैक्सी सेवाओं पर असर पड़ सकता है। यात्रियों को कैब मिलने में परेशानी होने की संभावना जताई जा रही है।
क्या हैं ड्राइवरों की दो मुख्य मांगें?
ड्राइवर यूनियन ने केंद्र सरकार से दो बड़ी मांगें रखी हैं। न्यूनतम किराया तय किया जाए: यूनियन का कहना है कि कंपनियां मनमाने तरीके से किराया तय कर रही हैं, जिससे ड्राइवरों की कमाई कम हो रही है। वे चाहते हैं कि सरकार फिक्स बेस किराया लागू करे। निजी वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर सख्ती यूनियन मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 के उस प्रावधान का विरोध कर रही है, जिसमें बिना कमर्शियल नंबर प्लेट वाले निजी वाहनों को भी सेवा देने की अनुमति दी गई है।
यूनियन ने क्या कहा?
तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) के अध्यक्ष शेख सलाहुद्दीन के अनुसार, मौजूदा नियम लाइसेंसधारी ड्राइवरों के लिए नुकसानदायक हैं। उनका कहना है कि सरकार अगर किराया तय करेगी तो ड्राइवरों और यात्रियों दोनों को फायदा होगा और व्यवस्था संतुलित रहेगी। यूनियन का दावा है कि लाखों ऐप-आधारित ड्राइवर असुरक्षा और कमाई की अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं, जबकि प्लेटफॉर्म कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं। ड्राइवरों ने सरकार से निष्पक्ष नियम बनाने और बातचीत शुरू करने की मांग की है।
आर्थिक सर्वे में भी उठी चिंता
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी गिग वर्कर्स की आय को लेकर चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 40% गिग वर्कर्स की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। वहीं देश में गिग वर्कर्स की संख्या तेजी से बढ़कर करीब 1.2 करोड़ हो चुकी है। ड्राइवरों के ऐप से ऑफलाइन रहने की वजह से शनिवार को कई शहरों में कैब और बाइक टैक्सी मिलना मुश्किल हो सकता है। खासकर पीक आवर्स में यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।





