नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। NPPA (नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी) ने 8 मुख्य दवाओं पर कीमतों मे करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। इन दवाओं के मंहगे होने से उन मरीजों की परेशानी बढ़ गई है जो टीबी, आस्थमा और थैलिसिमिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। सरकार ने एक बयान में कहा कि ये फैसला 8 अक्टूबर को हुई एक मीटिंग के दौरान लिया गया, जिसमें 8 दवाओं के 11 फॉर्मूलेशन की अधिकतम कीमतों में 50 फीसदी बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई।
इन दवाओं की कीमत में होंगे बदलाव (Medicine Price Increased)
बढी हुई दवाओं की कीमतों की लिस्ट में Benzyl Penicillin IU injection और Atropine injection 06.mg/ml, इंजेक्शन के लिए Streptomycin powder 750 mg और 1000 mg, Salbutamol टैबलेट 2 mg और 4 mg, respirator solution 5 mg/ml; Pilocarpine 2% ड्रॉप्स; Cefadroxil टैबलेट 500 mg, इंजेक्शन के लिए Desferrioxamine 500 mg और लिथियम टैबलेट 300 mg शामिल हैं।
कीमत बढ़ने के पीछे क्या कारण रहे
अब सवाल उठता है कि जरूरी दवाइयों की कीमतों में बढ़ोतरी के क्या कारण हो सकते हैं तो इसका सीधा जवाब है कि NPPA को दवा कंपनियो की ओर से लगातार कीमतों में बढ़ोतरी की मांग की जा रही थी। उनकी ओर से कहा जा रहा था कि दवा बनाने की लागत में बढ़ोतरी हो रही है, एक्सचेंज रेट में भी बदलाव हो रहा है जिसके चलते ये दवा कंपनियां घाटे में चल रही थी जिसके चलते उन्होंने अपनी दवाओं की मार्केटिंग करनी बंद कर दी। जब तक कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान नहीं हुआ था तब तक दवाओं की सप्लाई में भी काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा था।




