नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देश में हाईवे नेटवर्क के तेजी से विस्तार के साथ रोज़ाना लाखों वाहन लंबी दूरी तय कर रहे हैं, लेकिन टोल प्लाजा पर रुकना अब भी यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है। फास्टैग लागू होने के बावजूद कई जगह लंबी कतारें, ट्रैफिक जाम और समय की बर्बादी आम बात है। इसी समस्या को खत्म करने के लिए अब सरकार और एजेंसियां नई एडवांस तकनीक पर काम कर रही हैं, जिससे बिना टोल प्लाजा रुके ही टोल टैक्स वसूला जा सकेगा और यात्रियों का सफर पहले से कहीं ज्यादा तेज, सुगम और तनावमुक्त हो जाएगा।
सूरत से शुरू हुआ देश का पहला बिना बैरियर टोल सिस्टम
हाईवे यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है, क्योंकि देश का पहला बिना बैरियर वाला टोल बूथ गुजरात के सूरत में शुरू कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था में अब वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी, गाड़ियां बिना स्पीड कम किए निकलेंगी और टोल अपने आप कट जाएगा। इस एडवांस सिस्टम में हाई-रिजोल्यूशन कैमरे, जीपीएस और ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो वाहन की पहचान कर डिजिटल तरीके से टोल वसूल करेगी। इसका मकसद टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों, जाम और समय की बर्बादी को पूरी तरह खत्म करना है। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में इसे देशभर के हाईवे पर लागू किया जा सकता है, जिससे सफर और भी तेज, स्मार्ट और स्मूथ हो जाएगा।
बिना रुके कटेगा टोल, कैमरे पढ़ेंगे नंबर प्लेट
नए टोल कलेक्शन सिस्टम में अब टोल प्लाजा और बैरियर की जरूरत ही नहीं होगी। सड़क पर लगे हाई-रिजोल्यूशन कैमरे हर गुजरने वाले वाहन की नंबर प्लेट को ऑटोमैटिक पढ़ लेंगे और उसी के आधार पर टोल वसूला जाएगा। खास बात यह है कि अगर किसी वाहन में फास्टैग नहीं भी लगा है, तब भी सिस्टम नंबर प्लेट के जरिए उसकी पहचान कर लेगा। ऐसी स्थिति में टोल न चुकाने को उल्लंघन माना जाएगा और वाहन मालिक के पते पर सीधे ई-चालान भेज दिया जाएगा। इस तकनीक से न सिर्फ जाम और समय की बर्बादी खत्म होगी, बल्कि टोल कलेक्शन भी पूरी तरह डिजिटल, तेज और पारदर्शी हो जाएगा।
रडार-लिडार से होगी 360° निगरानी, रियल टाइम कटेगा टोल
नई बिना-बैरियर टोल तकनीक में हर लेन पर रडार और लिडार आधारित एडवांस कैमरे लगाए जाएंगे, जो 360 डिग्री तक वाहनों की रिकॉर्डिंग करेंगे। हर गुजरने वाले वाहन का डेटा रियल टाइम में सीधे कंट्रोल रूम और एनएचएआई के सर्वर पर दर्ज होगा, जिससे कोई भी गाड़ी बिना टोल पेमेंट के निकल नहीं पाएगी। यह हाई-टेक सिस्टम पहले से ही दुबई, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में सफलतापूर्वक इस्तेमाल हो रहा है और अब भारत में भी टोल वसूली को तेज, पारदर्शी और जाम-मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
फास्टैग में बैलेंस कम तो कैसे कटेगा टोल?
अगर आपकी गाड़ी में फास्टैग लगा है लेकिन उसमें बैलेंस कम है या वह ब्लैकलिस्टेड है, तब भी नया बिना-बैरियर टोल सिस्टम वाहन को तुरंत पहचान लेगा। ऐसी स्थिति में वाहन को डिफॉल्टर के तौर पर दर्ज किया जाएगा और वाहन मालिक को SMS व ऐप के जरिए अलर्ट भेजा जाएगा। तय समय के भीतर फास्टैग रिचार्ज नहीं करने पर सिस्टम अपने आप ई-चालान जारी कर देगा, यानी अब बैलेंस कम होने पर भी टोल से बच पाना संभव नहीं होगा।
टोल चोरी पर सख्त नजर, बचना होगा नामुमकिन
नए बिना-बैरियर टोल सिस्टम में जानबूझकर टोल चोरी करने वालों के लिए कोई रास्ता नहीं बचेगा। हर लेन में लगे 360 डिग्री कैमरे हर एंगल से रिकॉर्डिंग करेंगे, जिससे किसी भी वाहन की पहचान आसानी से हो जाएगी। सिस्टम रियल-टाइम में डेटा कैप्चर करता है, इसलिए चालाकी दिखाकर निकलना लगभग असंभव होगा। आने वाले समय में इस तकनीक को देश के अन्य हाईवे पर भी लागू किया जा सकता है, जिससे न सिर्फ टोल चोरी रुकेगी बल्कि यात्रियों का सफर भी तेज, स्मूथ और झंझट-मुक्त हो जाएगा।





