नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ओर से अगले महीने आम लोगों फिर से खुशखबरी मिल सकती है। दरअसल एक रिपोर्ट के अनुसार रिजर्व बैंक जल्द ही अपनी ब्याज दरें घटा सकता है। यह कटौती लोन लेने वाले और ईएमआई चुकाने वालों को फायदा होगा।
यह कटौती 7 से 9 अप्रैल को होने वाली बैठक के बाद की जा सकती है
रिसर्च एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने अपने पूर्वानुमान में बताया कि आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी आर्थिक वृद्धि को रफ्तार देने की कोशिश के तहत अप्रैल में अपनी समीक्षा बैठक में प्रमुख नीतिगत दर रेपो में 0.25% की कटौती कर सकता है। 18 से 27 मार्च के बीच हुए इस सर्वे में 60 में से 54 अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रिजर्व बैंक अपनी बेंचमार्क रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 6% कर देगा। यह कटौती 7 से 9 अप्रैल को होने वाली बैठक के बाद की जा सकती है। यानी रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कटौती की घोषणा 9 अप्रैल को कर सकता है।
आरबीआई मौद्रिक नीति के मोर्चे पर अधिक ढील दे सकता है।
इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कह कि उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2024-25 में सकल मुद्रास्फीति घटकर 4.7 प्रतिशत रहेगी। वित्त वर्ष 2025-26 में मौद्रिक नीति में कुल मिलाकर 0.75 प्रतिशत तक की कटौती हो सकती है।’ उन्होंने कहा कि हालांकि यदि अमेरिका के जवाबी शुल्क का प्रभाव अपेक्षा से अधिक हुआ तो ऐसे में आरबीआई मौद्रिक नीति के मोर्चे पर अधिक ढील दे सकता है।
महंगाई दर घटने का मिलेगा फायदा
भारत में फरवरी महीने में महंगाई दर घटकर 3.61 प्रतिशत पर आ गई है, जो कि पिछले सात महीनों में सबसे कम है। अर्थव्यवस्था के इस वित्त वर्ष में 6.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। यह पिछले चार सालों में सबसे कम है। यही कारण है कि रिजर्व बैंक को ब्याज दरें घटाने का मौका मिला है।
पिछले महीने ही ब्याज दरों में हुई थी कटौती
रिजर्व बैंक ने पिछले महीने 7 फरवरी को ही ब्याज दरों में कटौती की थी। केंद्रीय बैंक ने मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग के बाद रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कमी की घोषणा की थी। इस कमी के साथ रेपो रेट 6.50 प्रतिशत से घटकर 6.25 प्रतिशत रह गई है। अप्रैल के बाद अगली 25 बेसिस अंकों की कटौती अगस्त में हो सकती है।
क्या है रेपो रेट
रेपो रेट के आधार पर ही RBI बैंकों को लोन देता है। ब्याज दरों में कटौती होने से न सिर्फ लोन सस्ता हो जाता है बल्कि ईएमआई का बोझ भी कुछ हल्का हो जाता है। अगर रिजर्व बैंक फिर से ब्याज दरों में कमी करता है तो इससे आम आदमी को महंगाई से कुछ राहत मिलेगी। वहीं जिन्हें लोन लेना है, उन्हें भी कम ब्याज दर पर लोन मिल जाएगा।





