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Friday, March 6, 2026
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New Wage Code: सालाना ₹61,000 तक घटेगी इन-हैंड सैलरी, PF-ग्रेच्युटी बढ़ेगी, टैक्स में भी राहत, समझें पूरा गणित

केंद्र सरकार द्वारा नोटिफाई किए गए नए वेज कोड से अप्रैल 2026 के बाद कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर बदल जाएगी, जिससे इन-हैंड सैलरी घटेगी लेकिन PF और ग्रेच्युटी बढ़ेगी।

नई दिल्ली/ रफ्तार डेस्‍क । पिछले कई सालों से न्यू वेज कोड (New Wage Code) को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चलती रही हैं, कहीं कहा गया कि इन-हैंड सैलरी घटेगी, तो कहीं यह तर्क दिया गया कि बेसिक पे 50% होने से अलाउंस कम हो जाएंगे। अब ये बातें केवल चर्चा नहीं रहीं। केंद्र सरकार ने 21 नवंबर 2025 को नए लेबर कोड्स को नोटिफाई कर दिया है और अप्रैल 2026 से इन्हें देशभर में लागू करने की तैयारी है।

नया साल शुरू हो चुका है और जनवरी का महीना चल रहा है। यानी कर्मचारियों के पास अब करीब तीन महीने हैं, जिनमें उन्हें अपनी सैलरी स्ट्रक्चर को समझना और भविष्य के असर का अंदाजा लगाना होगा। तय है कि अप्रैल के बाद आपकी सैलरी स्लिप पहले जैसी नहीं रहेगी। लेकिन सवाल यही है न्यू टैक्स रिजीम के दौर में, जहां 12.75 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स नहीं लगता, वहां न्यू वेज कोड आपकी जेब को कितना प्रभावित करेगा?

इन-हैंड सैलरी पर क्यों है सबसे ज्यादा फोकस?

हर महीने सैलरी खाते में आते ही सबसे पहले नजर जाती है इन-हैंड अमाउंट पर। CTC और एनुअल पैकेज बाद में देखे जाते हैं। नए लेबर कोड लागू होने के बाद यही आदत बदल सकती है, क्योंकि अब बेसिक सैलरी की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा अहम हो जाएगी। नए नियमों के तहत PF और ग्रेच्युटी जैसे रिटायरमेंट बेनिफिट्स तो बढ़ेंगे, लेकिन इसके बदले हर महीने हाथ में आने वाली रकम कुछ हद तक कम हो सकती है। राहत की बात यह है कि टैक्स के मोर्चे पर असर सीमित रहने वाला है।

पहले समझिए नए लेबर कोड्स क्या हैं?

केंद्र सरकार ने देश के 29 पुराने लेबर कानूनों को मिलाकर चार नए लेबर कोड्स तैयार किए हैं-

– कोड ऑन वेजेज

– इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड

– सोशल सिक्योरिटी कोड

– ऑक्युपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड

इनमें से कोड ऑन वेजेज सीधे तौर पर सैलरी से जुड़ा है। आम भाषा में इसी को न्यू वेज कोड कहा जाता है।

सबसे बड़ा बदलाव क्या है?

न्यू वेज कोड के अनुसार Basic Pay + DA + Retaining Allowance = कुल CTC का कम से कम 50% होना चाहिए। अभी अधिकतर कंपनियां बेसिक सैलरी को 30–40% तक रखती हैं और बाकी रकम अलग-अलग अलाउंस में देती हैं। इससे PF और ग्रेच्युटी का आधार कम रहता है। नया नियम इसी गणित को बदल देता है।

सालाना CTC ₹25 लाख: पहले और बाद का फर्क

अगर किसी कर्मचारी का सालाना CTC ₹25 लाख है, तो पुराने स्ट्रक्चर में जहां बेसिक सैलरी CTC का 40% यानी ₹10 लाख थी, वहीं नए वेज कोड के तहत यह बढ़कर 50% यानी ₹12.50 लाख हो जाएगी। इसके चलते अन्य अलाउंस ₹13.31 लाख से घटकर करीब ₹10.40 लाख रह जाएंगे।

PF की बात करें तो पहले कर्मचारी और कंपनी, दोनों की तरफ से ₹1.20-1.20 लाख का योगदान होता था, जो नए ढांचे में बढ़कर ₹1.50-1.50 लाख हो जाएगा। इसी तरह ग्रेच्युटी ₹48,077 से बढ़कर ₹60,096 पहुंच जाएगी। इसका असर यह होगा कि टैक्सेबल इनकम ₹23.31 लाख से घटकर लगभग ₹22.90 लाख रह जाएगी।

नोट: Employer PF और ग्रेच्युटी CTC का हिस्सा हैं, लेकिन टैक्सेबल इनकम में नहीं जुड़ते।

टैक्स में कितना फायदा होगा?

बेसिक सैलरी बढ़ने से PF और ग्रेच्युटी का हिस्सा बढ़ जाता है, जो टैक्सेबल इनकम में शामिल नहीं होता। इसी वजह से सालाना TDS पहले जहां ₹2,74,799 बनता था, वह नए स्ट्रक्चर में घटकर ₹2,63,874 रह जाएगा। यानी सालाना करीब ₹10,925 की टैक्स बचत हो सकती है।

मंथली इन-हैंड सैलरी पर असर

₹25 लाख CTC वाले कर्मचारी की मंथली ग्रॉस सैलरी पहले और बाद दोनों ही स्थितियों में लगभग ₹2.08 लाख रहती है। हालांकि TDS में हल्की कमी के बावजूद PF कटौती बढ़ने से इन-हैंड सैलरी घट जाती है। पहले जहां हर महीने करीब ₹1,61,427 हाथ में आते थे, वहीं नए वेज कोड के बाद यह घटकर लगभग ₹1,56,336 रह जाएंगे। यानी मंथली इन-हैंड सैलरी में करीब ₹5,000 की कमी आएगी।

सालाना CTC ₹10 लाख होने पर क्या बदलाव होगा?

₹10 लाख CTC के मामले में पहले बेसिक सैलरी ₹4 लाख थी, जो नए नियम के तहत बढ़कर ₹5 लाख हो जाएगी। इसके चलते अलाउंस ₹5.32 लाख से घटकर करीब ₹4.16 लाख रह जाएंगे। PF योगदान में बढ़ोतरी होगी—कर्मचारी और कंपनी दोनों की तरफ से ₹48,000 की जगह ₹60,000 का योगदान जाएगा। ग्रेच्युटी भी ₹19,231 से बढ़कर ₹24,038 हो जाएगी। टैक्सेबल इनकम ₹9.32 लाख से घटकर ₹9.16 लाख के आसपास रहेगी। चूंकि न्यू टैक्स रिजीम में ₹12.75 लाख तक की इनकम पर टैक्स नहीं लगता, इसलिए यहां टैक्स का कोई दबाव नहीं होगा। हालांकि PF कटौती बढ़ने की वजह से मंथली इन-हैंड सैलरी करीब ₹1,200 से ₹1,500 तक कम हो सकती है। अच्छी बात यह है कि रिटायरमेंट सेविंग ₹1.44 लाख से बढ़कर करीब ₹1.84 लाख हो जाएगी।

सालाना CTC ₹15 लाख: इन-हैंड पर साफ असर

₹15 लाख के पैकेज में पहले बेसिक सैलरी ₹6 लाख थी, जो नए वेज कोड के बाद ₹7.50 लाख हो जाएगी। अलाउंस में कटौती के साथ PF और ग्रेच्युटी का योगदान बढ़ेगा। टैक्सेबल इनकम लगभग ₹13.99 लाख से घटकर ₹13.74 लाख रह जाएगी। इस स्लैब में टैक्सेबल इनकम ₹12.75 लाख से ऊपर होने के कारण सालाना टैक्स करीब ₹25,000 से ₹35,000 के बीच बनता है। PF बढ़ने से टैक्स थोड़ा कम जरूर होता है, लेकिन मंथली इन-हैंड सैलरी में करीब ₹3,000 से ₹3,500 की गिरावट देखने को मिलती है। वहीं रिटायरमेंट सेविंग ₹2.16 लाख से बढ़कर ₹2.76 लाख तक पहुंच जाती है।

सालाना CTC ₹20 लाख: टैक्स राहत, लेकिन इन-हैंड कम

₹20 लाख CTC वाले कर्मचारियों के लिए बेसिक सैलरी ₹8 लाख से बढ़कर ₹10 लाख हो जाएगी। अलाउंस घटेंगे, जबकि PF योगदान कर्मचारी और कंपनी—दोनों के लिए ₹96,000 से बढ़कर ₹1.20 लाख हो जाएगा। ग्रेच्युटी भी ₹38,462 से बढ़कर ₹48,077 हो जाएगी। टैक्सेबल इनकम करीब ₹18.66 लाख से घटकर ₹18.32 लाख रह जाएगी। न्यू टैक्स रिजीम के तहत सालाना टैक्स पहले ₹1.55–1.60 लाख के आसपास था, जो नए स्ट्रक्चर में घटकर ₹1.45–1.50 लाख रह सकता है। यानी करीब ₹8,000 से ₹12,000 की टैक्स राहत मिलती है, लेकिन PF और ग्रेच्युटी बढ़ने की वजह से मंथली इन-हैंड सैलरी लगभग ₹4,500 से ₹5,000 कम हो जाती है। रिटायरमेंट सेविंग इस दौरान ₹2.88 लाख से बढ़कर ₹3.68 लाख तक पहुंच जाती है।

आगे क्या होगा?

वेज कोड नोटिफाई हो चुका है। बाकी लेबर कोड्स राज्यों के साथ मिलकर लागू किए जाएंगे। कंपनियां धीरे-धीरे अपने सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव करेंगी और कर्मचारियों को नया ब्रेक-अप मिलेगा। यानी असर एक झटके में नहीं, बल्कि चरणों में दिखेगा।

आखिर मकसद क्या है?

नए लेबर कोड्स का उद्देश्य आपकी सैलरी घटाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि आपकी कमाई का बड़ा हिस्सा भविष्य की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल हो। भले ही इन-हैंड सैलरी थोड़ी कम हो, लेकिन PF और ग्रेच्युटी के जरिए आपका रिटायरमेंट फंड पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगा।

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