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Tuesday, March 3, 2026
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नए लेबर कोड से बदलेगा महिलाओं का वर्किंग फ्यूचर, सुरक्षा से लेकर अवसरों तक मिलेंगी कई नई सुविधाएं

भारत में लागू नए लेबर कोड महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर, सुरक्षित कार्यस्थल और बेहतर सम्मान सुनिश्चित करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार ये सुधार महिला वर्कफोर्स की भागीदारी को मजबूती देंगे।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । भारत में लागू होने जा रहे नए लेबर कोड महिलाओं के लिए सिर्फ रोजगार के दरवाजे ही नहीं खोलेंगे, बल्कि उन्हें काम के दौरान सम्मान और सुरक्षित माहौल भी प्रदान करेंगे। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ एम्प्लॉयर्स (AIOE) और प्रमुख लॉ फर्म शारदुल अमरचंद मंगलदास द्वारा जारी एक हालिया रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि ये सुधार महिलाओं की वर्कफोर्स में भागीदारी को नई दिशा दे सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, देश में बनाए गए चारों नए लेबर कोड 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हो गए हैं। इनका उद्देश्य महिलाओं के लिए कार्यस्थल को अधिक सुरक्षित बनाना, रोजगार से जुड़े नियमों को सरल करना और बेहतर कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देना है। अध्ययन में बताया गया है कि ये बदलाव आने वाले समय में महिलाओं के लिए करियर ग्रोथ और स्थिरता के नए अवसर पैदा करेंगे। इस रिपोर्ट को “ब्रेकिंग द ग्लास सीलिंग: हाउ द लेबर कोड्स बूस्ट विमेन्स पार्टिसिपेशन इन इंडिया’स वर्कफोर्स” नाम दिया गया है, जो संकेत देता है कि ये सुधार महिलाओं की पेशेवर सीमाओं को तोड़ने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

आंकड़े बता रहे हैं बदलती तस्वीर

रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि भारत में महिलाओं की रोजगार भागीदारी में तेजी से सुधार हुआ है। जहां वर्ष 2017–18 में कामकाजी महिलाओं की हिस्सेदारी महज 23.3 प्रतिशत थी, वहीं 2023-24 तक यह आंकड़ा बढ़कर 41.7 प्रतिशत तक पहुंच गया है। ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि भारतीय महिला वर्कफोर्स पहले की तुलना में कहीं अधिक सक्रिय और सशक्त हो रही है। बढ़ती भागीदारी यह भी दर्शाती है कि कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए अवसर और स्वीकार्यता दोनों में इजाफा हुआ है।

कानूनों और योजनाओं ने बदली कामकाजी महिलाओं की तस्वीर

महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत में समय-समय पर कई अहम कानून और सरकारी पहलें लागू की गई हैं। इनमें सबसे अहम भूमिका मैटरनिटी बेनेफिट्स अधिनियम, 1961 की है, जिसने कामकाजी महिलाओं को मातृत्व के दौरान कानूनी संरक्षण और सुविधाएं प्रदान कीं।

इसके अलावा, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संरक्षण कानून, 2013 ने ऑफिस और संस्थानों में महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। इन कानूनी प्रावधानों ने महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ाया है और उन्हें बिना डर के काम करने का अवसर दिया है।

सरकार की मिशन शक्ति, NAVYA और WISE-KIRAN जैसी योजनाएं भी महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। इन सभी प्रयासों का असर साफ तौर पर महिला वर्कफोर्स की बढ़ती भागीदारी के रूप में देखा जा सकता है।

वहीं, नए लेबर कोड्स के जरिए रोजगार से जुड़े पुराने और जटिल कानूनों को आधुनिक रूप दिया गया है। अलग-अलग नियमों को समेटकर एक सरल और प्रभावी व्यवस्था बनाई गई है, जिससे कंपनियों के लिए नियमों का पालन करना आसान होगा और महिलाओं के लिए कार्यस्थल की सुरक्षा और सुविधाएं और बेहतर होंगी।

महिलाओं को मिलेंगी लंबी पेड लीव और बेहतर सुविधाएं

सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत महिलाओं को मिलने वाली मैटरनिटी सुविधाओं को पहले की तरह सुरक्षित रखा गया है। इसके अनुसार, कामकाजी महिलाओं को 26 हफ्ते की पेड मैटरनिटी लीव का लाभ मिलता रहेगा, जिससे वे बिना किसी आर्थिक चिंता के मातृत्व का समय बिता सकें। इसके साथ ही, एडॉप्शन या सरोगेसी के जरिए मां बनने वाली महिलाओं को भी 12 हफ्ते की सवेतन छुट्टी प्रदान की जाएगी। कानून में यह भी प्रावधान है कि महिलाओं को नर्सिंग ब्रेक की सुविधा मिलेगी, ताकि वे बच्चे की देखभाल के साथ काम जारी रख सकें।

इसके अलावा, मेडिकल सहायता और सपोर्ट से जुड़ी सेवाओं को और मजबूत किया जा रहा है। प्रेग्नेंसी से जुड़े जरूरी दस्तावेज़ों की प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है, जिससे महिलाओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। ये सभी पहल महिलाओं को नौकरी और स्वास्थ्य के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद करेंगी और वर्कफोर्स में उनकी निरंतर भागीदारी को प्रोत्साहित करेंगी।

नए लेबर कोड से महिलाओं को मिलेंगी ये सुविधाएं

नए लेबर कोड्स के तहत महिलाओं के लिए कई अहम सुविधाओं का दायरा बढ़ाया जा रहा है। ईएसआई (ESI) कवरेज अब पहले से अधिक जिलों और विभिन्न इंडस्ट्री सेक्टर्स तक पहुंचाया जाएगा, जिससे लाखों महिला कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिलेगा। इसका विशेष फायदा बागान और प्लांटेशन सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं को मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जा रहा है। ऐप-आधारित काम करने वाली महिलाओं को इससे न सिर्फ हेल्थ और सोशल सिक्योरिटी मिलेगी, बल्कि उनके रोजगार में स्थिरता भी आएगी, जिससे परिवार और काम के बीच संतुलन बनाना आसान होगा।

नए कोड्स महिलाओं को लगभग हर सेक्टर में काम करने की अनुमति देते हैं। पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ामों के साथ महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट में काम करने के रास्ते भी खुलेंगे। खास तौर पर आईटी, हेल्थकेयर, एविएशन और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टरों में महिलाओं के लिए नए करियर अवसर सामने आएंगे। हालांकि, इन सुधारों का वास्तविक असर तभी नजर आएगा, जब कंपनियां और नियोक्ता इन नियमों को ईमानदारी और सही तरीके से लागू करेंगे।

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