नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। 13 फरवरी यानी आज संसद में नया इनकम टैक्स बिल पेश किया जाएगा, जो 1961 के पुराने आयकर कानून की जगह लेगा। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य कर कानून को सरल बनाना, करदाताओं की समझ में आसान बनाना और मुकदमेबाजी के बोझ को कम करना है। वक्फ बिल पर JPC की रिपोर्ट पर मचे हंगामे के बाद लोकसभा दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। संभावना जताई जा रही है कि दो बजे जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू होगी तब ये बिल पेश किया जाएगा।
असेसमेंट ईयर’ की जगह ‘टैक्स ईयर’ का इस्तेमाल
अब इनकम टैक्स में ‘असेसमेंट ईयर’ शब्द की जगह ‘टैक्स ईयर’ शब्द का उपयोग किया जाएगा। यह 12 महीने की अवधि होगी, जो 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलेगा। यदि कोई नया बिजनेस शुरू किया जाता है, तो उसका टैक्स ईयर उसी तारीख से शुरू होकर चालू वित्तीय वर्ष के साथ समाप्त होगा। इस बदलाव से टैक्स रिपोर्टिंग अधिक पारदर्शी और सरल होगी।
आसान भाषा में नया टैक्स कानून
नए इनकम टैक्स बिल में कानूनी भाषा को अधिक सरल बनाया गया है। पुराने इनकम टैक्स एक्ट में 823 पन्ने थे, जबकि नया बिल 622 पन्नों में तैयार किया गया है। हालांकि, चैप्टर्स की संख्या 23 ही रखी गई है, लेकिन सेक्शन की संख्या 298 से बढ़ाकर 536 कर दी गई है। इसके अलावा, शेड्यूल की संख्या 14 से बढ़ाकर 16 कर दी गई है। यह बदलाव करदाताओं के लिए नियमों को समझने में मदद करेगा।
डिजिटल ट्रांजैक्शन और क्रिप्टो पर सख्त नियम
क्रिप्टोकरेंसी जैसी वर्चुअल डिजिटल एसेट्स को अब अनडिस्क्लोज्ड इनकम के तहत गिना जाएगा। यानी, यह नकदी, बुलियन और ज्वेलरी की तरह कर के दायरे में आएगा। सरकार ने यह कदम डिजिटल लेन-देन को पारदर्शी बनाने और टैक्स चोरी रोकने के लिए उठाया है।
टैक्सपेयर्स चार्टर की शुरुआत
नए बिल में टैक्सपेयर्स चार्टर को शामिल किया गया है, जो टैक्स भरने वालों के अधिकारों की रक्षा करेगा। यह चार्टर करदाताओं और कर अधिकारियों की जिम्मेदारियों और अधिकारों को स्पष्ट करेगा। इससे टैक्स से जुड़े मामलों का समाधान आसान होगा और टैक्स प्रशासन अधिक पारदर्शी बनेगा।
नया कानून बनने की प्रक्रिया
इस बिल को पहले ही कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे लोकसभा में पेश किया जाएगा, जहां इसे स्थायी संसदीय समिति को भेजे जाने की संभावना है। समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार इसमें जरूरी बदलाव कर सकती है। फिर इसे संसद में पास किया जाएगा और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह आधिकारिक कानून बन जाएगा। सरकार कई वर्षों से इनकम टैक्स कानून को सरल बनाने की कोशिश कर रही थी। इसके लिए 2018 में एक टास्क फोर्स बनाई गई थी, जिसने 2019 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इससे पहले 2009 में यूपीए सरकार ने डायरेक्ट टैक्स कोड (DTC) पेश किया था, लेकिन वह पास नहीं हो सका था। अब, इनकम टैक्स बिल 2025 को इस दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। नया इनकम टैक्स बिल टैक्सपेयर्स के लिए नियमों को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने का प्रयास है। डिजिटल लेन-देन पर कड़े प्रावधान, क्रिप्टो टैक्सेशन और टैक्सपेयर्स चार्टर जैसे बदलाव इसे एक महत्वपूर्ण सुधार बनाते हैं। यदि यह बिल पास हो जाता है, तो 1 अप्रैल 2026 से देश में नया टैक्स सिस्टम लागू हो जाएगा।





