नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 92 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है। श्री सिंह ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में कई ऐसे कार्य किए हैं जिनसे देश की तस्वीर बदली है। उनके प्रयासों का ही नतीजा था कि देश तरक्की के रास्ते पर चल पड़ा था। जानिए आर्थिक क्षेत्र में उनकी प्रमुख उपलब्धियां। आज भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था मनमोहन सिंह के प्रयासों से ही बन सका है। अब यह देश की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की कगार पर पहुंच रहा है। पता हो कि 90 के दशक में देश की आर्थिक हालात बहुत खराब थी। उस समय देश के प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव और वित्त मंत्री दिवंगत डॉ मनमोहन सिंह थे। ग्लोबल मार्केट में भारत की अर्थव्यवस्था काफी निचले स्तर पर थी, भारतीय पैसा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हो गया था, साथ ही विदेशी मुद्रा भंडार भी खत्म होने वाला था। देश एक तरह से दिवालिया होने की कगार पर खड़ा हो गया था। ऐसे में वित्त मंत्री ही थे जिन्होंने देश के मिजाज को समझते हुए ऐसे महत्वपूर्ण फैसले किए जिनसे भारत की तस्वीर ही बदल गई।
विदेशी निवेश के लिए दरवाजे खोले
दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वर्ष 1991 से 1996 तक वित्त मंत्री रहते हुए कई आर्थिक संकट दूर किए। उन्होंने भारत की स्थिति को समझते हुए कई फैसले लिए और इकोनॉमी को संकट से निकाला। उनका सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम रहा ‘लाइसेंस राज’ खत्म करना। मनमोहन सिंह ने आर्थिक क्षेत्र ने कई ऐसी नीतियां बनाईं जिनके जरिए देश में विदेशी निवेश के दरवाजे खुल गए।
भारत में तेजी से विदेशी निवेश शुरू हो गया
लाइसेंसी राज खत्म होना आर्थिक उदारीकरण के नए युग की शुरुआत माना गया। जिसका श्रेय मनमोहन सिंह को ही जाता है। विदेशी आयात के लिए लाइसेंस खत्म करना कई तरह के बिजनेस के लिए लाभकारी साबित हुआ। क्योंकि विदेशी आयात के लिए लाइसेंस की बाध्यता खत्म हो गई थी।
इसके अलावा विदेशी निवेश की सीमा भी बढ़ा दी गई थी। जिसका फायदा हुआ कि भारत में तेजी से विदेशी इन्वेस्टमेंट शुरू हो गया। आज देश में जिन विदेशी कंपनियों ने पैर पसारे हैं, वे मनमोहन सिंह की ही देन मानी जाती हैं। उन्होंने कॉर्पोरेट टैक्स से लेकर आयात शुल्क में कटौती समेत कई बड़े फैसले किए थे।
अमेरिका से न्यूक्लियर डील
मनमोहन सिंह के बड़े फैसलों में अगला और महत्वपूर्ण कदम अमेरिका के साथ भारत की न्यूक्लियर डील होना रहा। राजस्थान के पोखरण में देश के पहले परमाणु परीक्षण के बाद अमेरिका और भारत के रिश्तों में तनाव देखने को मिला था। साल 2004 में मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए दोनों के देशों के बीच के खराब रिश्तों को सुधारने के लिए कई प्रयास किए। अमेरिका के साथ न्यूक्लियर डील के लिए उन्हें UPA गठबंधन सरकार के सहयोगी लेफ्ट का कड़ा विरोध भी झेलना पड़ा। फिर भी उन्होंने इस परमाणु समझौते को आगे बढ़ाने का फैसला लिया था।
इस डील के बाद अमेरिकी सहयोग का रास्ता फिर से खुल गया था
आखिरकार 2008 में अमेरिका और भारत के बीच ऐतिहासिक समझौता हो गया। उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश थे। India-US Nuclear Deal देश में ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों के लिए मील का पत्थर साबित हुई। इस डील के बाद अमेरिकी सहयोग का रास्ता फिर से खुल गया था।
आधार कार्ड मनमोहन सिंह के प्रयासों का ही नतीजा
मनमोहन सिंह के प्रयासों का ही नतीजा रहा कि देश में आधार कार्ड अस्तित्व में आया। इस आधार कार्ड ने हर भारतीय को अपनी पहचान दिलाई। श्री सिंह की यह सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। गौरतलब है कि आधार कार्ड आज न सिर्फ हर भारतीय की पहचान है, बल्कि वित्तीय सेवा से जुड़े कामों के लिए भी सबसे महत्वपूर्ण आईडी बन गया है। जनवरी 2009 में भारत के निवासियों को विशिष्ट पहचान दिलाने और विभिन्न सेवाओं को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से आधार कार्ड योजना शुरू हुई थी ।




