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Wednesday, March 4, 2026
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जानिए क्या होता है CIBIL स्‍कोर, इससे कैसे तय होती है लोन की योग्‍यता और क्रेडिट लिमिट ?

सिबिल स्कोर तीन अंकों की संख्या है या यूं कहें कि स्कोर है। इसकी रेंज 300 से लेकर 900 अंकों तक होती है। जो कि आपके लोन लेने की योग्यता को दिखाता है।

नई दिल्‍ली/रफ्तार डेस्क। कोई भी वित्‍तीय संस्‍थान किसी व्‍यक्ति को लोन या क्रेडिट कार्ड ऑफर करने से पहले उस व्‍यक्ति का सिबि‍ल स्‍कोर चेक करता है। यदि आप लोन और क्रेडिट कार्ड बिल को चुकाते रहते हैं तो आपका सिबिल स्कोर बेहतर होता जाता है वहीं यदि आप कोई डिफॉल्ट करते हैं तो आपका सिबिल स्कोर भी खराब होता जाता है। इस खबर में जानिए आखिर क्‍या होता है CIBIL स्‍कोर और इससे कैसे तय होती है लोन की योग्‍यता ?

सिबिल स्कोर क्‍या है?

सिबिल स्कोर तीन अंकों की संख्या है या यूं कहें कि स्कोर है। इसकी रेंज 300 से लेकर 900 अंकों तक होती है। जो कि आपके लोन लेने की योग्यता को दिखाता है। आपके पुराने लोन, क्रेडिट कार्ड के बिल आदि के आधार पर यह संख्या तय होती है। यदि आप समय पर अपने सारे लोन और क्रेडिट कार्ड की पेमेंट करते रहते हैं तो आपका सिबिल स्कोर अच्‍छा माना जाता है। वहीं यदि आप कोई डिफॉल्ट करते हैं तो सिबिल स्कोर भी खराब हो जाता है। सिबिल स्‍कोर खराब होने की कई वजह हैं जानिए- 

लोन की EMI समय पर न भरना नुकसानदायक

यदि पहले से ही आपने कोई लोन ले रखा है और आप उसकी ईएमआई भरना भूल जाते हैं या समय पर नहीं भरते हैं तो इसका सीधा असर आपके सिबिल स्कोर पर पड़ता है। ईएमआई मिस करने या लोन डिफॉल्ट होने पर सिबिल इतना खराब हो जाता है किसी भी बैंक से लोन मिल पाना मुश्किल हो जाता है। क्‍योंकि आगे यदि लोन लेते हैं तो बैंक को यह डर रहेगा कि आप उसका लोन चुका पाएंगे या नहीं। 

बड़ा कर्जा लेने पर हो सकता है आवेदन रिजेक्ट

यदि आपने पहले कोई बड़ा कर्जा ले रखा है तो इससे भी आपका सिबिल खराब हो जाता है और आपका आवेदन रिजेक्ट हो सकता है। क्‍योंकि यह दिखाता है कि आपके ऊपर पहले से ही बहुत सारा कर्ज है, जिसे चुकाना बाकी है। ऐसी स्थिति में बैंक को आपको दूसरा लोन देने से पहले सोचना पड़ता है क्‍योंकि शायद आप उसका लोन ना चुका पाएं। 

अलग-अलग बैंक में लोन अप्लाई करना गलत

कई बार आप लोन लेने के लिए अलग-अलग बैंकों में अप्लाई करते हैं और जिस बैंक से कम ब्याज दर पर लोन मिलता है, वहां से लोन उठा लेते हैं। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यदि आपने कई बैंकों में लोन की एप्लिकेशन डाली है, तो हर बैंक की तरफ से आपका सिबिल स्कोर चेक किया जाएगा और ये हार्ड इन्क्वायरी के तहत होता है। ऐसे में हार्ड इन्क्वायरी से सिबिल स्कोर कम हो जाता है।

क्रेडिट कार्ड की लिमिट से अधिक यूज 

कई बार क्रेडिट कार्ड से बड़ी खरीदारी या बहुत ज्यादा खरीदारी कर लेते हैं, ऐसे में कार्ड की लिमिट क्रास हो जाती है। इसका सीधा इसका सिबिल स्कोर पर पड़ता है। इससे क्रेडिट कार्ड का यूटिलाइजेशन रेश्यो बढ़ जाता है जो सिबिल स्कोर कम कर देता है। ऐसे में ध्‍यान रखना जरूरी है कि अपने क्रेडिट कार्ड की लिमिट का 30 फीसदी से कम ही यूज करें। 

समय से पहले लोन चुका देना 

यदि आप किसी लोन को समय से पहले बंद कर देते हैं तो इसका सीधा असर सिबिल पर पड़ता है। बैंक सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड दो तरह के लोन देता है। यदि आपने सिक्योर्ड लोन लिया है और उसे समय से पहले बंद करा देते हैं तो आपका सिबिल थोड़ा कम हो सकता है।

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