नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । इन दिनों भारत में जनसंख्या का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। एक ओर जहां लोगों की औसत उम्र बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर परिवार छोटे होते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में अब लोग रिटायरमेंट की तैयारी युवावस्था से ही करने लगे हैं, ताकि आगे चलकर पैसों की कोई चिंता न रहे। हालांकि, आज भी कुछ लोग रिटायरमेंट प्लानिंग को टालते रहते हैं। वे या तो पुराने तरीकों से ही बचत करते हैं या यह मान लेते हैं कि बुढ़ापे में परिवार उनका सहारा बनेगा। लेकिन यही सोच भविष्य में उन्हें आर्थिक दिक्कतों में डाल सकती है।
दरअसल, बढ़ते मेडिकल खर्चों, लगातार बढ़ती महंगाई और एकल परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए, आज के समय में मजबूत रिटायरमेंट प्लानिंग हर व्यक्ति के लिए बेहद जरूरी हो गई है। ऐसे में नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को एक भरोसेमंद विकल्प माना जाता है। आज की तारीख में NPS एक बेहतरीन योजना के रूप में उभर कर सामने आया है। यह स्कीम नौकरी के दौरान अनुशासित रूप से बचत करने की आदत डालती है। इसका उद्देश्य है कि जब आप सेवानिवृत्त हों, तब तक आपके पास एक अच्छी-खासी रकम जमा हो जाए और रिटायरमेंट के बाद नियमित रूप से पेंशन मिलती रहे। इस योजना की निगरानी और संचालन पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) द्वारा किया जाता है। तो सवाल यह है कि आपके रिटायरमेंट प्लान में NPS को जगह क्यों मिलनी चाहिए?
1. कम लागत में प्रोफेशनल मैनेजमेंट
NPS को निवेश के उन विकल्पों में गिना जाता है जिनकी लागत सबसे कम होती है। इसमें आपके पैसे का प्रबंधन PFRDA द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ पेंशन फंड मैनेजर (PFM) करते हैं। NPS की नियामक संरचना इस बात की गारंटी देती है कि यह पूरी तरह पारदर्शी हो, सभी नियमों का पालन हो और निवेशकों को उच्चतम सुरक्षा मिलती रहे।
2. मार्केट से जुड़े रिटर्न और कंपाउंडिंग का फायदा
NPS में आपका निवेश इक्विटी (शेयर बाजार), कॉर्पोरेट बॉन्ड, सरकारी सिक्योरिटीज और वैकल्पिक निवेश फंड्स (AIF) जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है। इस वजह से, यह FD जैसे पारंपरिक निवेशों की तुलना में लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखता है। आप अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार यह चुन सकते हैं कि आपका पैसा कहां लगाया जाए (जिसे ‘एसेट एलोकेशन’ या ‘एक्टिव चॉइस’ कहा जाता है), या फिर आप ‘ऑटो चॉइस’ (लाइफ साइकिल) विकल्प का भी चयन कर सकते हैं। इसमें एक विशेष एल्गोरिथ्म होता है जो आपकी उम्र बढ़ने के साथ इक्विटी निवेश को धीरे-धीरे कम करता है और डेट इंस्ट्रूमेंट्स (ऋण आधारित साधनों) में निवेश बढ़ाता है, ताकि जोखिम नियंत्रित रहे।
3. लचीलापन और नियंत्रण
NPS में आप साल में चार बार तक अपनी एसेट एलोकेशन बदल सकते हैं और साथ ही हर साल एक बार अपने पेंशन फंड मैनेजर को भी बदलने का विकल्प आपके पास होता है। इसके अलावा, आप एक्टिव और ऑटो चॉइस के बीच भी आसानी से स्विच कर सकते हैं। यह योजना आपको अपनी निवेश रणनीति को जरूरत और बाजार की स्थिति के अनुसार बदलने की पूरी आज़ादी देती है, ताकि आप हमेशा अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप निर्णय ले सकें।
4. अनुशासित तरीके से संपत्ति बनाना
NPS आपको नियमित और अनुशासित बचत करने की आदत डालने में मदद करता है। उदाहरण के लिए, 5,000 रुपये की मासिक SIP अगर आप 25 से 30 साल तक करते हैं, तो यह कंपाउंडिंग और इक्विटी निवेश की ताकत से 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक हो सकती है। इस बचत के साथ टैक्स में भी छूट मिलने से आपकी रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा और मजबूत फंड तैयार होता है।
5. आजीवन पेंशन और एकमुश्त राशि का लचीला विकल्प
जब आपकी उम्र 60 साल हो जाती है, तब NPS में जमा राशि को आप अपनी जरूरत और समझदारी के अनुसार निकाल सकते हैं। नियमों के मुताबिक, आप कुल फंड का 60% तक टैक्स-फ्री एकमुश्त या धीरे-धीरे निकाल सकते हैं। बाकी कम से कम 40% राशि से आपको अनिवार्य रूप से वार्षिकी (एन्युइटी) खरीदनी होती है, जिससे आपको जीवनभर नियमित पेंशन मिलती रहे। अगर चाहें तो निकासी को 75 साल की उम्र तक टाला भी जा सकता है। इसके अलावा, आप सिस्टमैटिक लंपसम विड्रॉल प्लान (SLWP) के माध्यम से 60% राशि को धीरे-धीरे निकालने का विकल्प भी चुन सकते हैं।
6. पोर्टेबिलिटी और डिजिटल सुविधा
चाहे आप नौकरी बदलें या शहर, आपका NPS अकाउंट आपके साथ रहता है। पूरा सिस्टम डिजिटल है, जिससे आप अपने खाते में ऑनलाइन निवेश कर सकते हैं, उसे ट्रैक कर सकते हैं और आसानी से मैनेज भी कर सकते हैं। यही वजह है कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को एक मजबूत और भरोसेमंद वित्तीय विकल्प माना जाता है।





