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Saturday, April 11, 2026
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SEBI चीफ माधबी बुच के पास अडानी की ऑफशोर कंपनियों के स्टेक थे, इसलिए अडाणी के खिलाफ एक्शन नहीं लियाः हिंडनबर्ग

हिंडनबर्ग के इस खुलासे को माधबी बुच और उनके पति धवल बुच ने आधारहीन बताया है। उन्होंने कहा कि वो अपने सारे दस्तावेज दिखाने को तैयार हैं।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। अमेरिका की हिंडनबर्ग रिसर्च ने एक नई रिपोर्ट निकाली है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अडानी की ऑफशोर कंपनियों में SEBI चीफ माधबी बुच और उनके पति धवल बुच के स्टेक्स थे। हिंडनबर्ग ने लिखा है कि उन्हें इस बात का शक है कि इसी वजह से SEBI ने अडानी ग्रुप के संदिग्ध ऑफशोर शेयरहोल्डर्स के खिलाफ उचित एक्शन नहीं लिया।

हालांकि, माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि ये आरोप आधारहीन हैं। उन्होंने लिखा, ‘इनमें बिल्कुल भी सच नहीं है। हमारा जीवन और हमारे फाइनेंसेस एक खुली किताब हैं।’ बता दें कि माधबी पुरी बुच साल 2017 में भारत की रेगुलेशन अथॉरिटी SEBI के सदस्य बनी थीं और साल 2022 से वो इसकी अध्यक्ष हैं।

अपनी रिपोर्ट में हिंडनबर्ग ने क्या लिखा है?

हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट की शुरुआत में लिखा है, ‘हमारी अडाणी रिपोर्ट के 18 महीने बाद भी SEBI ने आश्चर्यजनक रूप से अडाणी के मॉरिशस और ऑफशोर शेल कंपनियों पर ऐक्शन में कोई इंटरेस्ट नहीं दिखाया है।’

 

हिंडनबर्ग ने लिखा है, ‘सबूत होने के बाद भी, 40 और स्वतंत्र मीडिया इनवेस्टिगेशन के बाद भी जिनमें हमारे काम को सही माना गया और उसे आगे बढ़ाया गया, SEBI ने अडाणी ग्रुप के खिलाफ कोई सार्वजनिक कदम नहीं उठाया है।’ आपको बता दें कि जनवरी, 2023 में हिंडनबर्ग की एक रिपोर्ट आई थी, इसमें दावा किया गया था कि अडाणी ग्रुप ने बड़ी मात्रा में स्टॉक मैनुपुलेशन किया है। हालांकि अडाणी ग्रुप ने इन सभी आरोपों को गलत बताया था। अब हिंडनबर्ग ने दावा किया है कि सेबी अध्यक्ष के ऑफशोर अकाउंट्स में स्टेक्स थे। 

जनवरी 2023 में रिपोर्ट के सामने आने के बाद अडानी के शेयरों में तगड़ी गिरावट दर्ज की गई और गौतम अडानी जो कि दुनिया के नंबर 2 अरबपति बने थे। कुछ ही दिनों के अंदर 36वें नंबर पर लुढ़क गए। हिंडनबर्ग रिपोर्ट के सामने आने के बाद गौतम अडानी की संपत्ति में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई थी। रिपोर्ट के सामने आने के कुछ ही दिनों के अंदर अडानी ग्रुप की वैल्यूवेशन 86 अरब डॉलर तक घट गई थी। शेयर प्राइस में इस भारी गिरावट के बाद समूह ने विदेश में लिस्टेड बॉन्ड में भारी कटौती की थी।

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