नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । भारत सरकार की कुछ बचत योजनाएं ऐसी हैं जो सुनिश्चित (गारंटीड) रिटर्न प्रदान करती हैं। ये योजनाएं उन निवेशकों के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं जो जोखिम लेने से बचते हैं, चाहे रिटर्न शेयर बाजार की तुलना में कम ही क्यों न हो। पोस्ट ऑफिस की नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) स्कीम ऐसी ही एक सुरक्षित और भरोसेमंद योजना है। इसमें न केवल अच्छा रिटर्न मिलता है, बल्कि निवेश की गई रकम भी पूरी तरह सुरक्षित रहती है। इस योजना के तहत आप अपने नजदीकी डाकघर में जाकर आसानी से NSC खाता खोल सकते हैं और निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। आइए, इस बचत योजना के फायदे और इसकी पूरी जानकारी को विस्तार से समझते हैं।
कौन-कौन कर सकता है NSC में निवेश?
इंडिया पोस्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) योजना के तहत कई प्रकार के निवेशक खाता खोल सकते हैं। कोई भी अकेला व्यक्ति, तीन व्यस्क मिलकर संयुक्त खाता, या फिर किसी नाबालिग की ओर से उसका अभिभावक NSC अकाउंट खोल सकता है। इसके अलावा, 10 वर्ष या उससे अधिक उम्र का नाबालिग भी खुद अपने नाम से खाता खोलने के लिए पात्र होता है। यदि कोई व्यक्ति मानसिक रूप से अक्षम है, तो उसका अभिभावक उसकी ओर से यह खाता खोल सकता है।
यह खाता एक अधिकृत खाता माना जाता है। इस योजना की खास बात यह है कि आप जितने चाहें उतने एनएससी खाते खोल सकते हैं – इसमें कोई संख्या सीमा नहीं है। पोस्ट ऑफिस NSC स्कीम में निवेश की शुरुआत कम से कम 1,000 रुपये से की जा सकती है और उसके बाद आप 100 रुपये के गुणांक (मल्टीपल) में कोई भी राशि निवेश कर सकते हैं।
NSC स्कीम में कितना मिलता है ब्याज?
फिलहाल पोस्ट ऑफिस की नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) योजना के तहत जमा राशि पर 7.7% सालाना ब्याज दिया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति आज 10,000 रुपये का निवेश करता है, तो मेच्योरिटी पर उसे कुल 14,490 रुपये मिलते हैं। इसका मतलब है कि निवेश पर 4,490 रुपये का सुनिश्चित रिटर्न मिलता है, जो पूरी तरह टैक्स-सेफ और सुरक्षित होता है।
मेच्योरिटी से पहले पैसा निकालने के क्या हैं नियम?
भारतीय डाक (इंडिया पोस्ट) के नियमों के अनुसार, NSC खाता आम तौर पर मेच्योरिटी से पहले बंद नहीं किया जा सकता। हालांकि, अगर खाता निवेश की तारीख से एक साल के भीतर बंद किया जाता है, तो सिर्फ मूल राशि ही लौटाई जाएगी—कोई ब्याज नहीं मिलेगा। वहीं अगर खाता एक साल पूरे होने के बाद लेकिन तीन साल से पहले बंद किया जाता है, तो उस अवधि के लिए, डाकघर बचत खाते पर लागू ब्याज दर के हिसाब से ब्याज दिया जाएगा, लेकिन केवल पूरे महीनों के आधार पर।
कुछ विशेष परिस्थितियों में समय से पहले खाता बंद किया जा सकता है। जैसे – अगर सिंगल अकाउंट हो और खाताधारक की मृत्यु हो जाए। ज्वाइंट अकाउंट में किसी एक या दोनों खाताधारकों की मृत्यु हो जाए। यदि खाता राजपत्रित अधिकारी के आदेश पर जब्त किया गया हो (जैसे गिरवी रखने की स्थिति में)।




