नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । आज सोमवार, 12 मई को सोने की कीमतों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा। देश और विदेश दोनों बाजारों में गोल्ड की कीमतों में बिकवाली का माहौल देखने को मिला। भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में गोल्ड फ्यूचर्स 3,565 रुपये यानी 3.69% लुढ़ककर 92,985 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ को लेकर हुई बड़ी व्यापारिक डील मानी जा रही है
गिरावट की क्या है वजह ?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ टैरिफ को लेकर एक समझौते की घोषणा की, जिससे वैश्विक बाजारों में निवेशकों का रुख जोखिम वाले एसेट्स की ओर मुड़ गया और सेफ हैवन माने जाने वाले गोल्ड से दूरी बनाई गई। इस बीच, 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर सीजफायर का ऐलान भी हुआ, जिससे क्षेत्रीय तनाव में कमी आई। इसका असर भी गोल्ड की घरेलू कीमतों पर पड़ा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में गिरावट
12 मई को सिर्फ भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी सोने की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 1.4% गिरकर 3,277.84 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि यूएस गोल्ड फ्यूचर्स 2% की गिरावट के साथ 3,279.20 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर में आई नरमी है।
अमेरिकी अधिकारियों ने 11 मई को चीन के साथ एक अहम व्यापार समझौते की घोषणा की। उनका कहना है कि इस डील से अमेरिका का व्यापार घाटा घटेगा और आर्थिक स्थिरता बढ़ेगी। चीन ने भी इस समझौते की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहमति बन गई है। इस पॉजिटिव डेवलपमेंट के चलते निवेशकों ने सोने जैसे ‘सेफ हेवन’ एसेट से बाहर निकलकर जोखिम वाले एसेट्स की ओर रुख किया, जिससे गोल्ड की कीमतों में भारी गिरावट आई।
22 अप्रैल को गोल्ड ने बनाया था अब तक का सबसे ऊंचा रिकॉर्ड
जियोपॉलिटिकल तनाव और टैरिफ वॉर में नरमी की उम्मीद के चलते सोने में तेज बिकवाली देखने को मिली। आमतौर पर जब दुनिया में अनिश्चितता और तनाव बढ़ता है, तो निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित विकल्प मानकर उसमें निवेश करते हैं। इसके उलट, जब जोखिम कम होता है, तो वे सोने से पैसा निकालकर शेयर जैसे जोखिम वाले एसेट्स में निवेश करना शुरू कर देते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि 22 अप्रैल को गोल्ड ने अब तक का सबसे ऊंचा स्तर छू लिया था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 3,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी, जबकि भारत में सोने ने 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का आंकड़ा पार कर लिया था।
निवेशकों को क्या करना चाहिए ?
रिलायंस सिक्योरिटी के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी का कहना है कि चीन के साथ टैरिफ को लेकर हुई सकारात्मक बातचीत की वजह से डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई है। उन्होंने बताया कि पिछले हफ्ते स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच वार्ता हुई थी, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ा है।
जिगर त्रिवेदी के मुताबिक, निकट भविष्य में सोने की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है। डॉलर के मजबूत होने से गोल्ड की कीमतों पर दबाव बना रहेगा। उनका अनुमान है कि शॉर्ट टर्म में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना गिरकर 3,200 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है, जबकि भारत में गोल्ड फ्यूचर्स 90,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे आ सकता है। ऐसे में निवेशकों के लिए सलाह है कि वे इस गिरावट का फायदा उठाते हुए सोने में खरीदारी कर सकते हैं।




